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दुग्ध उत्पादक क्षेत्र में गुमराला महिला सहकारी सभा की नई सफलता की कहानी

मंडी, 31 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास अब परिणाम दिखाने लगे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा किए गए निर्णयों से दुग्ध उत्पादकों को विशेष लाभ मिल रहा है। दुग्ध उत्पादक महिला सहकारी सभा समितियां, जो पहले सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही थीं, अब आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो चुकी हैं। दूध के दाम में ऐतिहासिक वृद्धि से इन उत्पादकों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है और दूध उत्पादन में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

सराज विधानसभा क्षेत्र के घुमराला स्थित महिला दुग्ध उत्पादक और क्रय विक्रय सहकारी सभा समिति ने अपने कठिन संघर्षों के बाद उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। समिति के सचिव सुशील कुमार ने बताया कि 2003 में इस सहकारी सभा की स्थापना की गई थी, जब गांव के कुछ लोगों ने मिलकर इस संस्था की शुरुआत की थी। उस समय केवल 7 लीटर दूध एकत्रित किया जाता था, लेकिन आज यह सहकारी सभा सराज विधानसभा क्षेत्र में दुग्ध उत्पादक क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रही है।

सुशील कुमार ने बताया कि इस दुग्ध उत्पादक केंद्र में करीब 20 वर्षों से कार्य हो रहा है। पहले सरकारें दूध के दामों में केवल 1 से 2 रुपये की वृद्धि करती थीं, लेकिन 2022 में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने दुग्ध उत्पादकों के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं को समझा और उनके लिए 13 रुपये की एक साथ वृद्धि की। इसके बाद इस वर्ष के बजट में 6 रुपये की और वृद्धि की गई, जिससे अब गाय के दूध का समर्थन मूल्य 51 रुपये और भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 61 रुपये हो गया है।

इस केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं। यह केंद्र अब 7-8 किलोमीटर दूर से दूध एकत्रित करता है और पिछले साल 2024 के पीक सीजन में प्रतिदिन 1750 लीटर दूध एकत्रित हुआ। इस केंद्र में अब 824 पशुपालकों को जोड़कर उन्हें लाभ दिया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस केंद्र ने 3 लाख लीटर से अधिक दूध एकत्रित किया, जिसका मूल्य लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपये है।

सुशील कुमार ने बताया कि सहकारी सभा समिति अब दुग्ध उत्पादक केंद्र को और अधिक विविधतापूर्ण बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र में पनीर, खोआ, घी, दही और कुल्फी बनाना शुरू कर दिया गया है, ताकि केंद्र की आय में भी वृद्धि हो और यह बेहतर ढंग से काम कर सके।

इसके साथ ही सभा समिति ने लाभांश का आवंटन भी अपने सदस्यों में किया है और 40 हज़ार रुपये नकद के रूप में रखे गए हैं, ताकि किसी सदस्य को आवश्यकता पड़ने पर मदद मिल सके। यह कदम किसानों और दुग्ध उत्पादकों के लिए बड़ा सहारा साबित हो रहा है, खासकर तब जब वे आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होते और उन्हें तत्काल मदद की जरूरत होती है।

इस सफलता को लेकर घुमराला सहकारी सभा के प्रधान कल्याण सिंह, दुर्गी देवी, शयाणु राम और नैणी देवी सहित अन्य लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिला है।

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