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प्रतिनिधि सभा ने बांग्लादेश में हिंदू और अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों पर गहरी चिंता जताई

शिमला, 28 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हिमाचल प्रांत के संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगड़ा ने कहा है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए संघ निरंतर प्रयासरत है और इस दिशा में कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। डॉ. रांगड़ा ने शुक्रवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में बताया कि

प्रतिनिधि सभा ने बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे निरंतर अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेष रूप से इस्लामी कट्टरपंथी तत्वों द्वारा मंदिरों और धार्मिक स्थलों की तोड़फोड़, महिलाओं पर अत्याचार, जबरन मतांतरण और संपत्ति लूट जैसे कृत्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में देखे गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि सभा ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में ठोस कदम उठाने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर बांग्लादेशी हिंदू समाज के मानवाधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

डॉ. वीर सिंह रांगड़ा ने कहा कि बेंगलुरु में संपन्न हुई संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक में संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता और हिंदू समाज की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

संघ ने मणिपुर हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए हिंसा प्रभावित लोगों के लिए राहत कार्य चलाने की आवश्यकता बताई और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अपील की। संघ ने उत्तर-दक्षिण विभाजन को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि भाषा विवाद के समाधान के लिए मातृभाषा को प्राथमिकता देने की नीति को आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिले।

रांगड़ा ने कहा कि

हिमाचल प्रदेश में संघ की गतिविधियों का विस्तार तेजी से हो रहा है। प्रदेश में संघ की दृष्टि से 26 जिले हैं। इनमें कुल 737 स्थानों पर संघ कार्यरत है। वर्तमान में यहाँ 1004 शाखाएँ, 327 साप्ताहिक मिलन और 156 संघ मंडलियाँ सक्रिय हैं।

डॉ. वीर सिंह रांगड़ा ने कहा कि संघ द्वारा संचालित सामाजिक सेवा कार्यों की जानकारी देते हुए डॉ. रांगड़ा ने बताया कि देशभर में 89,706 सेवा गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। इनमें 40,920 शिक्षा, 17,461 चिकित्सा, 10,779 स्वावलंबन और 20,546 अन्य सामाजिक कार्यों से संबंधित हैं।

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