राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिविल मामलों में FIR गलत, DGP को नए निर्देश जारी करने के आदेश

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⚖️ हाईकोर्ट का सख्त रुख

राजस्थान उच्च न्यायालय ने सिविल प्रकृति के मामलों में एफआईआर दर्ज करने को गलत ठहराया है।
अदालत ने साफ कहा कि जब तक किसी मामले में आपराधिक तत्व स्पष्ट न हो, तब तक पुलिस को FIR दर्ज नहीं करनी चाहिए।

📢 DGP को नए निर्देश जारी करने के आदेश

कोर्ट ने राजस्थान पुलिस के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी करें।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि पहले जारी सर्कुलर का सख्ती से पालन हो।

🔍 लापरवाही पर जांच के निर्देश

अदालत ने कहा कि यह पता लगाया जाए कि सर्कुलर की पालना क्यों नहीं हुई।
जिस अधिकारी ने लापरवाही की है, उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाए।

📌 कब दर्ज हो सकती है FIR?

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया:

  • सिविल विवादों में FIR तभी दर्ज होगी, जब आपराधिक पहलू हो
  • संदेह की स्थिति में पुलिस अधीक्षक की अनुमति जरूरी होगी

🏛️ मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला टोंक जिले के निवाई क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक वाणिज्यिक विवाद को लेकर FIR दर्ज की गई थी।
आरोप था कि भुगतान को लेकर विवाद को पुलिस ने आपराधिक रूप दे दिया।

📜 सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों और DGP के सर्कुलर में भी यही स्पष्ट किया गया है कि सिविल मामलों में पुलिस को हस्तक्षेप सीमित रखना चाहिए।

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