कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए दो मामले
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में चाईबासा कोऑपरेटिव बैंक से खाताधारकों की रकम की कथित अवैध निकासी के दो मामलों में आखिरकार प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय के आदेश के बाद हुई।
लंबे समय तक नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने पहले बैंक प्रबंधन और पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी। अदालत ने शिकायतों को गंभीर मानते हुए पुलिस को मामला दर्ज कर जांच का निर्देश दिया।
मुआवजा राशि फर्जी तरीके से निकालने का आरोप
पहला मामला तांतनगर थाना क्षेत्र के इलीगढ़ा गांव निवासी अमृत लाल कालुंडिया से जुड़ा है। उनका आरोप है कि उनके पिता स्वर्गीय मानसिंह कालुंडिया की अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की राशि फर्जी तरीके से निकाल ली गई।
शिकायत के मुताबिक गांव के कुछ लोगों ने खुद को मृतक का पुत्र बताकर बैंक में फर्जी खाता खुलवाया और रकम निकाल ली। पीड़ित ने बैंक कर्मियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई है।
वृद्ध महिला के खाते से निकाली गई पेंशन
दूसरा मामला मटकमहातु गांव की वृद्ध महिला जेमा कुई से संबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खाते से वृद्धावस्था पेंशन और जमा पूंजी बिना जानकारी के निकाल ली गई।
शिकायत के अनुसार जून 2022 से नवंबर 2024 के बीच लगातार खाते से रकम निकाली जाती रही। महिला ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक, कैशियर और अन्य बैंक कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
शिकायत दबाने का भी आरोप
पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बाद मामले को दबाने के लिए उनके खाते में कुछ राशि वापस जमा कराई गई थी।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस अब बैंक खातों, निकासी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर बैंक कर्मियों और आरोपितों से पूछताछ भी की जाएगी।
खाताधारकों में बढ़ी चिंता
इन मामलों के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि बिना जानकारी खातों से पैसे निकाले जा सकते हैं, तो बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।



