राम जन्मभूमि परिसर में ध्वजारोहण का महत्व
आज, राम जन्मभूमि परिसर के शेषावतार मंदिर शिखर पर संतों ने ध्वजारोहण किया। यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम था जिसमें कई संतों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राम जन्मभूमि परिसर को एक नए युग में ले जाना था।
शेषावतार मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण
शेषावतार मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम शाम 5 बजे शुरू हुआ। इसमें कई संतों ने भाग लिया, जिनमें से कुछ प्रमुख संत थे – श्री रामभक्त रामपाल जी, श्री रामभक्त रामदेव जी, श्री रामभक्त रामकिशन जी, और श्री रामभक्त रामदास जी। इन संतों ने ध्वजारोहण के दौरान एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं और राम जन्मभूमि परिसर की शांति और सौहार्द की कामना की।
संतों के भाषण
शेषावतार मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण के दौरान, संतों ने अपने भाषणों में राम जन्मभूमि परिसर के महत्व को उजागर किया। श्री रामभक्त रामपाल जी ने कहा कि राम जन्मभूमि परिसर एक ऐसा स्थल है जो भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यहां पर राम का जन्म हुआ था और यहां पर ही उनका स्वर्गवास हुआ था। इसलिए, यह स्थल हमारे लिए एक पवित्र स्थल है।
ध्वजारोहण के बाद
शेषावतार मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण के बाद, संतों ने एक साथ एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं और राम जन्मभूमि परिसर की शांति और सौहार्द की कामना की। इस कार्यक्रम के दौरान, संतों ने राम की भक्ति के गीत गाए और उनके प्रति अपनी भक्ति का प्रदर्शन किया।
निष्कर्ष
शेषावतार मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम था जिसमें कई संतों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राम जन्मभूमि परिसर को एक नए युग में ले जाना था। संतों ने अपने भाषणों में राम जन्मभूमि परिसर के महत्व को उजागर किया और राम की भक्ति के गीत गाए। इस कार्यक्रम के बाद, संतों ने एक साथ एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं और राम जन्मभूमि परिसर की शांति और सौहार्द की कामना की।


