पुरानी दिल्ली में मोहर्रम के मौके पर निकाले गए ताजिये और मातमी जुलूस।
पुरानी दिल्ली में मोहर्रम का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार के मौके पर लोग अपने आप को दीन के तौर पर पेश करते हुए ताजिये और मातमी जुलूस निकालते हैं। इस साल भी पुरानी दिल्ली में मोहर्रम के मौके पर ताजिये और मातमी जुलूस निकाले गए। यह जुलूस पुरानी दिल्ली के मुख्य बाजारों से होकर गुजरा।
ताजिये की रौनक
ताजिये और मातमी जुलूस के अंतिम हिस्से में ताजिये निकाले जाते हैं। ताजिये में मोती और बरकत के सामान की माला बांधी जाती है। इन मोतियों को विभिन्न रंगों में रंगा जाता है जो बहुत ही आकर्षक लगता है। ताजिये की रौनक देखते ही लगता है कि यह एक अनोखा और अद्वितीय त्योहार है।
मातमी जुलूस की गहराई
मातमी जुलूस में लोग अपने आप को दीन के तौर पर पेश करते हुए मातमी नाचते हैं। यह नाच एक ऐसा नाच है जो बहुत ही गंभीर और गंभीरता से भरा होता है। मातमी जुलूस के दौरान लोग अपने सिर पर मातमी के पोस्टर लगाते हैं जो बहुत ही आकर्षक लगते हैं।
पुरानी दिल्ली के लोगों की भावनाएं
पुरानी दिल्ली के लोगों की भावनाएं बहुत ही गहरी होती हैं। वे इस त्योहार को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। उनकी भावनाएं इतनी गहरी होती हैं कि वे अपने दिलों में अपनी गहराई से जुड़े हुए होते हैं।
सुरक्षा की व्यवस्था
मोहर्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा की व्यवस्था बहुत ही सख्त होती है। वे सुनिश्चित करते हैं कि जुलूस शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से निकाला जाए। पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा की व्यवस्था इतनी अच्छी होती है कि लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।
निष्कर्ष
पुरानी दिल्ली में मोहर्रम के मौके पर निकाले गए ताजिये और मातमी जुलूस ने एक बार फिर से अपनी गहराई और गंभीरता से सबको प्रभावित किया। यह त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और पुरानी दिल्ली के लोगों की भावनाएं बहुत ही गहरी होती हैं।


