विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने गंगा परिसर एवं सरस्वती परिसर में स्थापित राजर्षि टंडन की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए कहा, “यह एक गर्व की मांत्रा है कि हमारे विश्वविद्यालय का नाम गंगा परिसर एवं सरस्वती परिसर में एक ऐसे व्यक्तित्व के साथ जोड़ा जा रहा है जिन्होंने समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है।”
आदमकद प्रतिमा का अनावरण
गंगा परिसर एवं सरस्वती परिसर में स्थापित राजर्षि टंडन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण आज प्रो. सत्यकाम ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा, “राजर्षि टंडन एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। उनके जीवन की कहानी हमें प्रेरित करती है और हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।”
प्रतिमा का महत्व
राजर्षि टंडन की आदमकद प्रतिमा का महत्व इस बात में है कि यह हमें उनके जीवन और कार्यों को याद दिलाती है। कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा, “यह प्रतिमा हमें याद दिलाती है कि हमें भी समाज के लिए कुछ करना होगा और हमें अपने जीवन में कुछ अद्वितीय करना होगा।”
विश्वविद्यालय के छात्रों की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय के छात्रों ने कहा कि यह प्रतिमा उनके लिए एक बड़ा स्त्रोत होगा। उन्होंने कहा, “यह प्रतिमा हमें प्रेरित करती है और हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।”
कुलपति के संदेश
कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा, “मैं विश्वविद्यालय के सभी छात्रों और कर्मचारियों से अनुरोध करता हूं कि वे राजर्षि टंडन के आदर्शों को अपना लें और समाज के लिए कुछ करें।”
निष्कर्ष
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने गंगा परिसर एवं सरस्वती परिसर में स्थापित राजर्षि टंडन की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए कहा, “यह एक गर्व की मांत्रा है कि हमारे विश्वविद्यालय का नाम गंगा परिसर एवं सरस्वती परिसर में एक ऐसे व्यक्तित्व के साथ जोड़ा जा रहा है जिन्होंने समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है।”


