दमोह में संचालित निजी स्कूलों को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। यहां कुछ निजी स्कूल हाईटेंशन लाइन के नीचे और संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निजी स्कूलों की स्थिति एक बड़ा सवाल
दमोह में कई निजी स्कूल हैं जो हाईटेंशन लाइन के नीचे और संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों की स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा पर खतरा है। हाईटेंशन लाइन के नीचे संचालित होने से बच्चों को बिजली के झटके का खतरा हो सकता है, जबकि संकरी गलियों में संचालित होने से बच्चों को दुर्घटना का खतरा हो सकता है।
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में नहीं रखा गया
दमोह के अधिकांश निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में नहीं रखा गया है। स्कूलों की इमारतें हाईटेंशन लाइन के नीचे स्थित हैं, जिससे बच्चों को बिजली के झटके का खतरा हो सकता है। स्कूलों की संकरी गलियों में संचालित होने से भी बच्चों को दुर्घटना का खतरा हो सकता है।
सुरक्षा मानकों की जांच की उठी मांग
दमोह में सुरक्षा मानकों की जांच की उठी मांग है। लोगों का कहना है कि निजी स्कूलों की स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है और बच्चों की सुरक्षा पर खतरा है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा मानकों की जांच कराने और स्कूलों की स्थिति में सुधार करने की मांग की है।
सरकार की जवाबदेही
दमोह में सुरक्षा मानकों की जांच की उठी मांग सरकार की जवाबदेही को भी प्रभावित करती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए। सरकार को स्कूलों की स्थिति में सुधार करने और सुरक्षा मानकों की जांच करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
निष्कर्ष
दमोह में संचालित निजी स्कूलों की स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। बच्चों की सुरक्षा पर खतरा है, जिससे सरकार को जांच कराने और सुधार करने की आवश्यकता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए और स्कूलों की स्थिति में सुधार किया जाए।


