उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से आईआईएएस शिमला द्वारा आयोजित ‘वंदे मातरम् की यात्रा’ पर स्थायी प्रदर्शनी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए

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उपराष्ट्रपति वंदे मातरम् प्रदर्शनी का उद्घाटन सत्र

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने वर्चुअल माध्यम से आईआईएएस शिमला द्वारा आयोजित ‘वंदे मातरम् की यात्रा’ पर स्थायी प्रदर्शनी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “वंदे मातरम् एक ऐसा मंत्र है जो हमें अपनी मातृभूमि की ओर आकर्षित करता है। यह एक ऐसा अभिवादन है जो हमारी शिक्षा, संस्कृति, और परंपराओं को दर्शाता है।”

वंदे मातरम् की महत्ता

उपराष्ट्रपति ने कहा, “वंदे मातरम् एक ऐसा अभिवादन है जो हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारी मातृभूमि की शिक्षा, संस्कृति, और परंपराओं को दर्शाता है। यह अभिवादन हमारी राष्ट्रीयता को बढ़ावा देता है और हमें अपनी मातृभूमि के प्रति जागरूक करता है।”

वंदे मातरम् और इसके प्रभाव

उपराष्ट्रपति ने कहा, “वंदे मातरम् का प्रभाव हमारे जीवन पर बहुत अधिक है। यह हमें अपनी मातृभूमि के प्रति जागरूक करता है और हमें अपनी संस्कृति को बचाने के लिए प्रेरित करता है। यह अभिवादन हमें अपने देश के प्रति समर्पित करता है और हमें अपने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है।”

वंदे मातरम् की यात्रा

उपराष्ट्रपति ने कहा, “वंदे मातरम् की यात्रा एक ऐसी यात्रा है जो हमारी मातृभूमि की शिक्षा, संस्कृति, और परंपराओं को दर्शाती है। यह यात्रा हमें अपनी मातृभूमि के प्रति जागरूक करती है और हमें अपनी संस्कृति को बचाने के लिए प्रेरित करती है।”

निष्कर्ष

उपराष्ट्रपति ने कहा, “वंदे मातरम् एक ऐसा मंत्र है जो हमें अपनी मातृभूमि की ओर आकर्षित करता है। यह एक ऐसा अभिवादन है जो हमारी शिक्षा, संस्कृति, और परंपराओं को दर्शाता है। यह अभिवादन हमारी राष्ट्रीयता को बढ़ावा देता है और हमें अपनी मातृभूमि के प्रति जागरूक करता है।”