ऋषिकेश परमार्थ निकेतन की सायंकालीन गंगा आरती में अध्यक्ष

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ऋषिकेश परमार्थ निकेतन की सायंकालीन गंगा आरती

ऋषिकेश परमार्थ निकेतन की सायंकालीन गंगा आरती में अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने शामिल होकर भक्तों के भावों को संजोया।

ऋषिकेश परमार्थ निकेतन की सायंकालीन गंगा आरती की शुरुआत

ऋषिकेश परमार्थ निकेतन में सायंकालीन गंगा आरती की शुरुआत हुई, जिसमें भक्तजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह आयोजन हिंदू धर्म के सबसे पवित्र नदियों में से एक गंगा नदी के किनारे आयोजित किया जाता है, जो हिंदू धर्म के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

सायंकालीन गंगा आरती में भक्तों का उत्साह

गंगा आरती में भक्तों का उत्साह देखकर कोई भी मन्त्र मुग्ध हो जाएगा। आरती के दौरान भक्तजन गंगा नदी के किनारे इकट्ठे होकर गीत गाते, भजन गाते और पूजा-अर्चना करते। उनके चेहरे पर भक्ति की एक अनोखी चमक दिखाई देती है, जो उनके मन की गहराई को दिखाती है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती के उद्बोधन

गंगा आरती के दौरान अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भक्तों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गंगा नदी हिंदू धर्म के लिए एक पवित्र नदी है, जो हमें शुद्धता और पवित्रता की शिक्षा देती है। उन्होंने भक्तों को गंगा नदी के किनारे आकर पूजा-अर्चना करने और अपने जीवन में शुद्धता और पवित्रता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।

गंगा आरती का महत्व

गंगा आरती का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है। यह आयोजन भक्तों को गंगा नदी के किनारे आकर पूजा-अर्चना करने और अपने जीवन में शुद्धता और पवित्रता को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है। गंगा नदी हिंदू धर्म के लिए एक पवित्र नदी है, जो हमें शुद्धता और पवित्रता की शिक्षा देती है।

निष्कर्ष

ऋषिकेश परमार्थ निकेतन की सायंकालीन गंगा आरती में अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने शामिल होकर भक्तों के भावों को संजोया। गंगा आरती का आयोजन भक्तों को गंगा नदी के किनारे आकर पूजा-अर्चना करने और अपने जीवन में शुद्धता और पवित्रता को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है।