आज की तारीख 14 जुलाई 2026 को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण घटना देखने को मिली। गैजेटेड ऑफिसर्स फोरम फॉर टेक्निकल एजुकेशन (जीओएफटीई) के सदस्यों ने सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को डीएसईयू से अलग करने और कर्मचारियों की मांगों को लेकर डीटीटीई कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। यह मार्च एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन था जिसमें जीओएफटीई के सदस्यों ने अपनी मांगों को उठाया और सरकार से जवाब मांगा।
कर्मचारियों की मांगें
जीओएफटीई के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर इस मार्च में भाग लिया। उन्होंने सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को डीएसईयू से अलग किया जाना चाहिए ताकि उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार काम करने की स्वतंत्रता मिल सके।
सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों की जरूरतें
जीओएफटीई के सदस्यों ने कहा कि सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को डीएसईयू से अलग करने से उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को अपने वित्तीय संसाधनों को नियंत्रित करने और अपने अधिकारों की रक्षा करने की जरूरत है।
डीटीटीई कार्यालय तक पैदल मार्च
जीओएफटीई के सदस्यों ने दिल्ली में डीटीटीई कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। यह मार्च एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन था जिसमें जीओएफटीई के सदस्यों ने अपनी मांगों को उठाया और सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों को सुनने की आवश्यकता है और उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने की अनुमति देनी चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार ने जीओएफटीई के सदस्यों की मांगों को सुनने की प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों को ध्यान से सुना है और जल्द ही उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कार्रवाई करेगी। सरकार ने कहा कि सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को डीएसईयू से अलग करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और जल्द ही उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने की अनुमति दी जाएगी।
निष्कर्ष
जीओएफटीई के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर डीटीटीई कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। यह मार्च एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन था जिसमें जीओएफटीई के सदस्यों ने अपनी मांगों को उठाया और सरकार से जवाब मांगा। सरकार ने जीओएफटीई के सदस्यों की मांगों को सुनने की प्रतिक्रिया दी है और जल्द ही उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कार्रवाई करेगी। सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को डीएसईयू से अलग करने से उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने की अनुमति मिलेगी।


