भुवनेश्वर : ओडिशा विधानसभा के विधायक पुरंदर मिश्रा ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नुआखाई पर्व में शामिल होने का निमंत्रण दिया। विधायक मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नुआखाई पर्व में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जो कि ओडिशा की एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक परंपरा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नुआखाई पर्व में शामिल होने का निमंत्रण
विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि नुआखाई पर्व ओडिशा की एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक परंपरा है, जो कि ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस पर्व में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिससे वह ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
नुआखाई पर्व का महत्व
विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि नुआखाई पर्व ओडिशा की एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक परंपरा है, जो कि ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस पर्व का महत्व ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने में है, जिससे ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को दुनिया भर में प्रस्तुत किया जा सके।
ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन
विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि नुआखाई पर्व ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिस पर ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस पर्व के दौरान ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को दुनिया भर में प्रस्तुत किया जा सके।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति का महत्व
विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति नुआखाई पर्व में शामिल होने के लिए ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति से ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को दुनिया भर में प्रस्तुत किया जा सके।
निष्कर्ष
विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नुआखाई पर्व में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जो कि ओडिशा की एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक परंपरा है। उन्होंने कहा कि इस पर्व का महत्व ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने में है, जिससे ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को दुनिया भर में प्रस्तुत किया जा सके।


