नेपाल के ऊर्जा मंत्री विराज भक्त श्रेष्ठ ने 2026 के अक्टूबर महीने में अपने कार्यकाल की शुरुआत करते हुए देश की ऊर्जा नीति में नई ऊर्जा और दिशा दी है। 1975 में जन्मे श्रेष्ठ, एक प्रतिष्ठित विद्युत इंजीनियरिंग स्नातक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ऊर्जा प्रबंधन विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय विद्युत निगम में की, जहाँ उन्होंने ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2022 में प्रधानमंत्री द्वारा ऊर्जा मंत्री के रूप में नियुक्ति के बाद से उन्होंने नेपाल की ऊर्जा अवसंरचना को आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ शुरू की हैं।
उन्नति पथ: शिक्षा और प्रारम्भिक करियर
श्रेष्ठ ने काठमांडू विश्वविद्यालय से विद्युत इंजीनियरिंग में बी.ई. और पी.एच.डी. पूरी की। इसके बाद उन्होंने जर्मनी के टेक्निकल यूनिवर्सिटी में शोध किया, जहाँ उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों पर कार्य किया। 2000 के दशक में उन्होंने नेपाल विद्युत निगम में काम करते हुए ग्रिड विस्तार और नवीनीकरण परियोजनाओं का नेतृत्व किया। उनकी तकनीकी दक्षता और प्रबंधन कौशल ने उन्हें ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ के रूप में प्रतिष्ठित किया।
ऊर्जा नीति में नई दिशा: नवीनीकरण प्रयास
मंत्री श्रेष्ठ ने 2026 में ऊर्जा नीति में “सतत विकास” को प्रमुख आधार बनाया। उन्होंने 2030 तक 60% नवीकरणीय ऊर्जा हिस्सेदारी का लक्ष्य निर्धारित किया। इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने जलविद्युत, पवन, सौर और बायोमास परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल को बढ़ावा दिया। इसके साथ ही, उन्होंने ग्रामीण विद्युत आपूर्ति को बढ़ाने हेतु माइक्रो ग्रिड और बैकअप ऊर्जा समाधान पर भी जोर दिया।
सार्वजनिक-निजी साझेदारी: परियोजनाओं का विस्तार
विराज श्रेष्ठ ने ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएँ लागू कीं। 2024 में शुरू हुई “ई-इंफ्रास्ट्रक्चर फंड” ने निजी कंपनियों को सौर और पवन परियोजनाओं में निवेश के लिए कर छूट और ऋण सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने “स्मॉल स्केल ग्रिड” कार्यक्रम के माध्यम से 15,000 से अधिक गांवों में विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की।
भविष्य की चुनौतियाँ और योजनाएँ
मंत्री श्रेष्ठ के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी ऊर्जा गरीबी और अवसंरचना की कमी है। उन्हें 2027 तक ग्रामीण इलाकों में 90% विद्युत कनेक्टिविटी प्राप्त करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए ऊर्जा दक्षता और कार्बन न्यूट्रलिटी पर भी कार्यरत हैं। ऊर्जा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को उजागर किया और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया।
निष्कर्ष
विराज भक्त श्रेष्ठ का नेतृत्व नेपाल की ऊर्जा नीति में एक नया अध्याय लिख रहा है। उनकी तकनीकी दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस और सार्वजनिक-निजी साझेदारी के मॉडल ने देश को ऊर्जा स्वावलंबन के करीब पहुँचाया है। आने वाले वर्षों में, यदि वे इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करते रहते हैं, तो नेपाल न केवल अपने नागरिकों को विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराएगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में भी अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।



