Image of the Landslide In Jorabat in Guwahati Outskirt.

जोराबत, गुवाहाटी के उपनगर में 02 अक्टूबर 2026 को एक भयंकर भूस्खलन की तस्वीर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। यह फोटो एक स्थानीय फोटोग्राफर द्वारा ली गई थी, जिसमें ढेरों मिट्टी के ढेर और ढहती हुई इमारतों का दृश्य स्पष्ट दिखाई देता है। इस घटना ने न केवल क्षेत्र के निवासियों के जीवन को खतरे में डाल दिया, बल्कि गुवाहाटी की बुनियादी ढांचा और यातायात व्यवस्था पर भी गहरा असर डाला।

जोराबत में अचानक आया धरती के नीचे का संकट

भारी वर्षा के बाद, जोराबत के पहाड़ी इलाकों में मिट्टी के ढेर ने अचानक अपने आप नीचे गिरकर एक भूस्खलन पैदा कर दिया। यह भूस्खलन मुख्य रूप से निचले हिस्सों के आवासीय क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है, जहां लगभग 300 परिवारों को अपनी घरों से विस्थापित होना पड़ा। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि लगभग 12 मीटर ऊंचा मिट्टी का ढेर सड़क को पूरी तरह से अवरुद्ध कर चुका है, जिससे गुवाहाटी के प्रमुख राजमार्गों पर भीड़ और देरी का सामना करना पड़ रहा है।

भारी वर्षा और अपरदन के कारण भूस्खलन का कारण

पिछले तीन दिनों में लगातार गिरती बारिश ने जोराबत के भू-तंत्र को अस्थिर कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार वर्षा के साथ-साथ क्षेत्र में अवैध कटाई और वनस्पति की कमी ने मिट्टी के अपरदन को बढ़ा दिया है। यह घटना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का एक स्पष्ट उदाहरण है, जहां तीव्र वर्षा और भू-परिवर्तन के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है। स्थानीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले हफ्ते भी इस क्षेत्र में भारी वर्षा की संभावना बनी रहेगी।

आपातकालीन टीमों ने तेजी से राहत कार्य शुरू किया

भूस्खलन के तुरंत बाद, गुवाहाटी पुलिस और रेस्क्यू टीम ने क्षेत्र में प्रवेश किया और प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय स्थल स्थापित किए। एंबुलेंस और फायर ट्रक ने घायल लोगों को अस्पताल ले जाने के लिए कार्यवाही की। जमीनी स्तर पर, स्वयंसेवी संगठनों ने भोजन, पानी और कपड़ों की आपूर्ति शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 15 लोगों को चिकित्सीय सहायता दी जा रही है, जबकि 3 लोग अभी भी ढहती मिट्टी के नीचे फंसे हुए हैं।

सरकार और NGOs ने समन्वित प्रयासों की घोषणा की

गुवाहाटी के मुख्यमंत्री ने आज सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि राज्य सरकार और कई गैर-सरकारी संगठनों ने मिलकर आपातकालीन सहायता के लिए एक समन्वित योजना बनाई है। योजना के तहत, 50 टन तक की मिट्टी को हटाने के लिए भारी उपकरणों का उपयोग किया जाएगा, साथ ही प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवास और खाद्य सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही, सरकार ने भविष्य में ऐसे भूस्खलनों को रोकने के लिए क्षेत्रीय भू-स्थिरता परियोजनाओं को तेज करने का वादा किया है।

निष्कर्ष

जोराबत के भूस्खलन ने गुवाहाटी के उपनगरीय इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया। यह घटना न केवल तत्काल राहत कार्यों की आवश्यकता को रेखांकित करती है, बल्कि दीर्घकालिक भू-परिवर्तन और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों की भी मांग करती है। सरकार और समाज को मिलकर ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए सतर्क रहना होगा, ताकि भविष्य में इसी तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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