डाॅ निवेदिता शर्मा, मप्र बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष

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डाॅ निवेदिता शर्मा, मप्र बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष

डॉ. निवेदिता शर्मा को महाराष्ट्र बाल संरक्षण आयोग (एमपीआरबीसी) की अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है, जो बाल अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह नियुक्ति बाल संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह आशा जगाती है कि बाल कल्याण के क्षेत्र में नयी ऊर्जा और नीतिगत बदलाव आएंगे। डॉ. शर्मा का शैक्षणिक पृष्ठभूमि, सामाजिक कार्य और न्यायिक अनुभव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है।

बाल अधिकारों की नई दिशा: डॉ. शर्मा का दृष्टिकोण

डॉ. शर्मा ने अपनी शिक्षा में बाल विकास और मनोविज्ञान का अध्ययन किया, और उन्होंने कई बार बाल कल्याण कार्यक्रमों का नेतृत्व किया। उनका मानना है कि बाल संरक्षण केवल कानूनी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सभी स्तरों पर जागरूकता और शिक्षा का भी महत्वपूर्ण योगदान है। वे बाल संरक्षण आयोग के काम को एक समग्र दृष्टिकोण से देखने की योजना बना रही हैं, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता को प्रमुख स्थान दिया जाएगा।

अनुभव से सशक्त: पूर्व कार्य और उपलब्धियाँ

पिछले दस वर्षों में, डॉ. शर्मा ने बाल अधिकारों के क्षेत्र में कई प्रमुख परियोजनाओं का संचालन किया। उन्होंने ‘सुरक्षित स्कूल’ पहल के माध्यम से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्कूलों को सुरक्षित बनाने के लिए काम किया। इसके अलावा, उन्होंने ‘किड्स फर्स्ट’ नामक कार्यक्रम के तहत बाल अपराधों की रिपोर्टिंग और समाधान के लिए एक राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म स्थापित किया। इन प्रयासों से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

आयोग का कार्यक्षेत्र और नई योजनाएँ

एमपीआरबीसी का मुख्य कार्य बाल संरक्षण, बाल अपराधों की जांच और बाल कल्याण के लिए नीतियाँ बनाना है। डॉ. शर्मा ने आयोग के कार्यक्षेत्र को विस्तृत करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें बाल स्वास्थ्य, पोषण, और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष बल दिया जाएगा। वे ‘डिजिटल डिफेंडर’ कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को ऑनलाइन दुरुपयोग से बचाने के लिए एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान शुरू करने की योजना बना रही हैं। इसके अतिरिक्त, आयोग के भीतर एक ‘बाल हेल्पलाइन’ को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव है, ताकि किसी भी प्रकार के शोषण की त्वरित रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा सके।

समाज में विश्वास जगाने के कदम

डॉ. शर्मा का मानना है कि बाल संरक्षण केवल कानूनी ढांचे पर निर्भर नहीं है, बल्कि समाज में विश्वास और सहयोग पर भी निर्भर करता है। इसके लिए वे स्थानीय स्वयंसेवकों, शिक्षकों और माता-पिता के साथ मिलकर ‘बाल संरक्षण क्लब’ की स्थापना की योजना बना रही हैं। इन क्लबों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाएगा और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग की रिपोर्टिंग के लिए एक सुरक्षित चैनल बनाया जाएगा।

निष्कर्ष

डॉ. निवेदिता शर्मा की अध्यक्षता में महाराष्ट्र बाल संरक्षण आयोग के पास एक नया दृष्टिकोण और मजबूत कार्य योजना है। उनके अनुभव, नवाचारी विचार और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से यह आशा की जा सकती है कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में ठोस प्रगति होगी। यह नियुक्ति न केवल बाल अधिकारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह सरकार की समाजिक कल्याण के प्रति गहरी जिम्मेदारी को भी दर्शाती है।