मुख्यमंत्री जन सेवा सदन में दिल्ली की विभिन्न रामलीला समितियों के सदस्यों से रविवार को मुलाकात करती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

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मुख्यमंत्री जन सेवा सदन में दिल्ली की विभिन्न रामलीला समितियों के सदस्यों से रविवार को मुलाकात करती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को जन सेवा सदन में दिल्ली की विभिन्न रामलीला समितियों के सदस्यों से मुलाकात कर, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक एकता के महत्व पर बल दिया। इस बैठक का उद्देश्य रामलीला परंपरा को समकालीन समाज के अनुरूप ढालते हुए, युवा पीढ़ी में इसकी प्रासंगिकता जगाना था। मुख्यमंत्री ने बताया कि रामलीला सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाजिक संवाद का एक मंच है, जिस पर सभी वर्गों के लोग मिलकर अपनी रचनात्मक ऊर्जा लगा सकते हैं।

रामलीला: परंपरा और नवाचार का संगम

इस सत्र में, रेखा गुप्ता ने रामलीला के इतिहास और उसकी आधुनिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में, रामलीला को नई तकनीकों के साथ जोड़कर, अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने डिजिटल मंचों, सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से रामलीला की कहानियों और परिधानों को प्रस्तुत करने की योजना की चर्चा की।

युवाओं का समावेश: शिक्षा और रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं के लिए कार्यक्रमों की योजना बताई। उन्होंने बताया कि रामलीला में भाग लेने वाले युवाओं को स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, सरकार द्वारा वित्तीय सहायता और उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे युवा अपनी कला और शिल्प कौशल को निखार सकें।

सामुदायिक सहयोग: महिलाओं और अल्पसंख्यकों की भूमिका

बैठक में महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के योगदान पर भी चर्चा हुई। रेखा गुप्ता ने कहा कि रामलीला के मंच पर सभी को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के लिए विशेष कार्यशालाएँ, सुरक्षा प्रबंध और प्रदर्शन के अवसर सुनिश्चित करने का वादा किया। साथ ही, अल्पसंख्यक समुदायों को भी रामलीला में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।

वित्तीय समर्थन और बुनियादी ढाँचे का विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा रामलीला के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाएगा। इस बजट से परिधानों, ध्वनि उपकरणों, मंच निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए फंडिंग उपलब्ध होगी। इसके अलावा, सरकार ने यह भी घोषणा की कि रामलीला के दौरान उपयोग होने वाले तंबुओं और स्टेज के लिए टिकाऊ और पर्यावरण‑अनुकूल सामग्री का प्रयोग किया जाएगा।

निष्कर्ष

रहना गुप्ता की इस बैठक ने रामलीला को एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि रामलीला केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, शिक्षा और रोजगार के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है। सरकार के समर्थन से, रामलीला में युवाओं, महिलाओं और अल्पसंख्यकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी, जिससे यह परंपरा नई पीढ़ी के लिए भी प्रासंगिक बनी रहेगी। इस प्रकार, रेखा गुप्ता ने एक समावेशी और समृद्ध सांस्कृतिक भविष्य की कल्पना प्रस्तुत की।