राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कुमाऊं विवि के रसायन विज्ञान विभाग के शोध केंद्र स्थित नैनोपार्टिकल प्रयोगशाला में विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते प्रतिभागी।

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राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कुमाऊं विवि के रसायन विज्ञान विभाग के शोध केंद्र स्थित नैनोपार्टिकल प्रयोगशाला में विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते प्रतिभागी।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कुमाऊं विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के शोध केंद्र में स्थित नैनोपार्टिकल प्रयोगशाला में विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते प्रतिभागियों ने नैनोप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू लीं। 5 अक्टूबर 2026 को आयोजित यह कार्यक्रम वैज्ञानिकों, शिक्षकों और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच ज्ञान विनिमय का एक प्रमुख मंच बना, जहाँ नैनोपार्टिकल के संश्लेषण, चरित्रांकन और अनुप्रयोगों पर गहन चर्चा और व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नैनोविज्ञान के अग्रणी शोध को प्रोत्साहित करना और छात्रों व शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराना था।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में नैनोप्रौद्योगिकी पर नया अध्याय

संगोष्ठी के उद्घाटन में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि नैनोप्रौद्योगिकी का स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्रों में अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के कार्यक्रम में 150 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागियों ने नैनोपार्टिकल संश्लेषण, सतह कार्यकरण और बायोमेडिकल इमेजिंग पर 12 घंटे के व्यावहारिक कार्यशालाएँ पूरी कीं। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण था “नैनोपार्टिकल आधारित दवा वितरण प्रणालियों” पर एक केस स्टडी, जिसमें प्रतिभागियों ने सिमुलेशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से दवा वितरण मॉडल तैयार किया।

कुमाऊं विवि के रसायन विज्ञान विभाग का अग्रणी प्रयोगशाला

कुमाऊं विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की नैनोपार्टिकल प्रयोगशाला में नवीनतम उपकरण जैसे कि स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (SEM), ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (TEM) और X-रे डिफ्रैक्शन (XRD) उपलब्ध हैं। प्रयोगशाला का प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर रोहित वर्मा ने कहा, “हमारा लक्ष्य नैनोमटेरियल्स के गुणों को नियंत्रित करके उन्हें विशिष्ट अनुप्रयोगों के लिए अनुकूल बनाना है।” प्रयोगशाला में 40 से अधिक शोध छात्र और पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता कार्यरत हैं, जो अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित शोध के साथ-साथ उद्योग साझेदारों के साथ परियोजनाएँ भी चला रहे हैं।

विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण: नैनोपार्टिकल संश्लेषण और अनुप्रयोग

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को तीन प्रमुख मॉड्यूल में बाँटा गया: (i) रासायनिक पद्धति से नैनोपार्टिकल संश्लेषण, (ii) सतह कार्यकरण और स्थिरीकरण तकनीकें, तथा (iii) नैनोपार्टिकल के बायोमेडिकल और ऊर्जा क्षेत्र में अनुप्रयोग। प्रशिक्षकों ने छात्रों को लैब में हाथों-हाथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया, जिससे वे नैनोमटेरियल्स के आकार, आकृति और वितरण को नियंत्रित कर सकें। प्रशिक्षण के अंत में, प्रत्येक समूह ने अपने संश्लेषित नैनोपार्टिकल्स के गुणों का विश्लेषण किया और एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार की। प्रशिक्षकों ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह व्यावहारिक अनुभव छात्रों को शोध परियोजनाओं के लिए आवश्यक कौशल से लैस करता है।

उद्योग और शैक्षणिक सहयोग से भविष्य की दिशा

संगोष्ठी के दौरान, उद्योग प्रतिनिधियों ने नैनोप्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण पर चर्चा की। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने एक नई साझेदारी घोषणा की, जिसमें भारतीय औद्योगिक शोध परिषद (IIRC) और एक प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनी शामिल हैं। इस सहयोग के तहत, छात्रों को इंटर्नशिप के अवसर और उद्योग में नैनोमटेरियल्स के वास्तविक अनुप्रयोगों का अनुभव मिलेगा। विश्वविद्यालय के डीन ने कहा, “हमारा उद्देश्य नैनोविज्ञान को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रसर करना और उद्योग की मांगों के अनुरूप शोध को बढ़ावा देना है।”

निष्कर्ष

कुमाऊं विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की नैनोपार्टिकल प्रयोगशाला में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी न केवल वैज्ञानिक ज्ञान का आदान-प्रदान सुनिश्चित करती है, बल्कि प्रतिभागियों को व्यावहारिक कौशल से भी लैस करती है। 5 अक्टूबर 2026 को हुए इस कार्यक्रम ने नैनोप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय शोध को नई दिशा दी, और भविष्य के लिए उद्योग एवं शैक्षणिक जगत के बीच मजबूत सहयोग की नींव रखी।