ओडिशा विजिलेंस

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ओडिशा विजिलेंस

ओडिशा के प्रमुख शहरों से लेकर दूरदराज के गाँवों तक, भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नई पहलें तेज़ी से फैल रही हैं। ६ अक्टूबर २०२६ को जारी की गई इस अभियान के तहत, राज्य सरकार ने एक व्यापक “विजिलेंस” योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना है। इस योजना में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, नागरिक रिपोर्टिंग चैनल और सख्त जाँच प्रक्रियाएँ शामिल हैं, जिससे ओडिशा को एक साफ़-सुथरे प्रशासनिक ढांचे की ओर अग्रसर किया जा सके।

ओडिशा में नई भ्रष्टाचार विरोधी नीति का आरम्भ

राज्यपाल के निर्देश पर, ओडिशा के प्रमुख विभागों ने ‘इलेक्ट्रॉनिक निगरानी’ और ‘रियल-टाइम ऑडिट’ प्रणालियाँ लागू की हैं। अब सरकारी खरीदारी, ठेके और सार्वजनिक कार्यों पर ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव है, जिससे किसी भी अनियमितता का पता तुरंत चल सकता है।

जाँच टीमों ने बढ़ाया डिजिटल निगरानी

विजिलेंस टीमों ने डेटा एनालिटिक्स और एआई आधारित टूल्स का उपयोग करते हुए शंकास्पद लेन-देन की पहचान की है। पिछले महीने ही १,२०० से अधिक संदिग्ध मामलों की जाँच शुरू हो गई, जिनमें से ४० प्रतिशत में ठोस सबूत मिले हैं।

नागरिकों को मिली जागरूकता और रिपोर्टिंग चैनल

सरकार ने ‘सिटिजन वॉच’ मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया, जिससे आम जनता सीधे भ्रष्टाचार के मामलों की रिपोर्ट कर सकती है। ऐप पर १,५०,००० से अधिक रिपोर्टें दर्ज की गई हैं, और ८० प्रतिशत मामलों में २४ घंटे के भीतर कार्रवाई की गई।

प्रमुख केसों में हुई प्रगति और चुनौतियाँ

इस वर्ष ओडिशा के एक प्रमुख राजमार्ग निर्माण प्रोजेक्ट में ₹४,००० करोड़ के ठेकेदार से ₹२५० करोड़ की गबन पाई गई। जाँच टीम ने ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया और फोरेंसिक जांच में २,५०० करोड़ की वसूली संभव हुई। हालांकि, कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुँच अभी भी सीमित है, जिससे कुछ भ्रष्टाचार के मामलों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है।

निष्कर्ष

ओडिशा विजिलेंस कार्यक्रम ने राज्य की प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को नई दिशा दी है। डिजिटल टूल्स, नागरिक सहभागिता और सख्त जाँच प्रक्रियाओं के समन्वय से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत ढाल तैयार हो रही है। भविष्य में सरकार की योजना है कि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाए, ताकि पूरे देश में ‘साफ़-सुथरे’ शासन की मिसाल कायम की जा सके।