जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की अध्यक्षता करते वित्त मंत्री सीतारमण

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जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की अध्यक्षता करते वित्त मंत्री सीतारमण

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक, जिसे वित्त मंत्री सीतारमण ने अध्यक्षता की, 08 अक्टूबर 2026 को हुई। इस सत्र में कर नीति के प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, जिसमें कर दरों में समायोजन, अनुपालन प्रक्रियाओं का सरलीकरण और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया। बैठक में उपस्थित सभी मंत्रियों और विशेषज्ञों ने भारतीय कर प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, समावेशी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। इस लेख में हम इस बैठक के मुख्य बिंदुओं और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालेंगे।

नयी कर दरों पर चर्चा: छोटे और बड़े उद्यमों के लिए राहत

इस सत्र में सबसे पहले कर दरों में संभावित बदलावों पर चर्चा की गई। वित्त मंत्री सीतारमण ने प्रस्ताव रखा कि छोटे उद्यमों के लिए 5% और 12% की दरों में राहत दी जानी चाहिए, जबकि बड़े उद्यमों के लिए 18% और 28% की दरें स्थिर रखी जाएँ। इस कदम का उद्देश्य छोटे व्यवसायों को कर भार से मुक्ति देकर उन्हें विकास के लिए प्रोत्साहित करना है।

डिजिटल गेटवे में सुधार: अनुपालन को आसान बनाने के कदम

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से कर दाखिल करने की प्रक्रिया को और सुगम बनाने के लिए कई तकनीकी सुधारों पर सहमति बनी। नई प्रस्तावित “स्मार्ट गेटवे” से करदाताओं को एक ही डैशबोर्ड पर सभी फाइलिंग, रिटर्न और ऑडिट कार्य करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, एक AI‑आधारित त्रुटि पहचान प्रणाली लागू की जाएगी, जो कर रिटर्न में त्रुटियों को तुरंत चिन्हित करेगी।

ई‑कॉमर्स के लिए विशेष प्रावधान: पारदर्शिता और कर संकलन

ई‑कॉमर्स क्षेत्र में कर संकलन को बेहतर बनाने के लिए एक नया प्रावधान पेश किया गया, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को अपने विक्रेताओं के कर विवरणों को सत्यापित करने के लिए बाध्य किया जाएगा। इससे कर चोरी के जोखिम को कम किया जा सकेगा और उपभोक्ताओं को भी सही कर भार का पता चलेगा। इसके अलावा, एक “वन‑स्टॉप‑शॉप” मॉडल लागू किया जाएगा, जिससे छोटे विक्रेताओं को अलग‑अलग प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

भविष्य की योजनाएँ: GST के तहत वित्तीय समावेशन

परिषद ने भविष्य के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया, जिसमें 2027 तक सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में GST पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम शामिल हैं। साथ ही, एक “कर शिक्षा अभियान” शुरू किया जाएगा, जिससे आम जनता को GST के लाभों और दायित्वों के बारे में जागरूक किया जा सके।

निष्कर्ष

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक ने कर नीति को और अधिक समावेशी और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। वित्त मंत्री सीतारमण के नेतृत्व में यह सत्र भारतीय कर व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और व्यवसाय‑अनुकूल बनाने के लिए एक नया अध्याय खोलता है। भविष्य में इन परिवर्तनों के प्रभाव को मापते हुए, सरकार ने यह वादा किया है कि GST को देश की आर्थिक प्रगति के लिए एक सशक्त उपकरण बनाये रखा जाएगा।