किसान, जो दशकों से अपनी जमींदारी और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, आज फिर से अपने मुद्दों को सरकार के सामने रखने के लिए एक कदम आगे बढ़ा। 8 अक्टूबर 2026 को, भारतीय किसान संघ के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर का दौरा किया और किसानों की प्रमुख मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। यह कदम किसान आंदोलन के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें वे कृषि नीतियों में मूलभूत बदलाव की मांग कर रहे हैं। यह लेख इस कार्यक्रम के मुख्य अंशों, किसानों की मांगों और सरकार की प्रतिक्रिया पर प्रकाश डालता है।
किसानों की मांगों का सारांश
किसानों ने अपने ज्ञापन में पाँच प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया। पहला, कृषि ऋण पर ब्याज दर में कटौती और अनुकूल पुनर्भुगतान शर्तें। दूसरा, अनाज की न्यूनतम खरीद कीमतों में वृद्धि तथा अनिवार्य खरीद अनुबंधों की स्थापना। तीसरा, कृषि उत्पादों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मूल्य निर्धारण तंत्र। चौथा, कृषि भूमि पर कर छूट और भूमि सुधार के तहत किसानों के अधिकारों की सुरक्षा। पाँचवाँ, कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सरकारी निवेश में वृद्धि। ये सभी मांगें किसानों की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक मानी गई हैं।
कलेक्ट्रेट में बैठक का माहौल और प्रतिक्रियाएँ
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करते ही, किसानों के प्रतिनिधियों ने अपने ज्ञापन को कलेक्ट्रेट के प्रमुख अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया। बैठक का माहौल शांत लेकिन दृढ़ था। अधिकारियों ने ज्ञापन को स्वीकार किया और कहा कि सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक समिति गठित करेगी। कुछ अधिकारियों ने बताया कि वे अगले महीने के भीतर एक प्रारूप तैयार करेंगे, जिसे बाद में किसानों के साथ साझा किया जाएगा। इस बीच, किसान प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों पर दोबारा बल दिया और कहा कि वे किसी भी समझौते पर सहमत नहीं होंगे यदि उनकी मूलभूत मांगें पूरी नहीं हुईं।
प्रमुख मांगें और अपेक्षाएँ
किसान संघ ने विशेष रूप से कृषि ऋण पर ब्याज कटौती को प्राथमिकता दी है। वे चाहते हैं कि बैंक ऋण पर ब्याज दर 2% तक घटाई जाए और पुनर्भुगतान अवधि में लचीलापन दिया जाए। इसके अलावा, किसानों ने अनाज की न्यूनतम खरीद कीमतों में 10% वृद्धि की मांग की है, ताकि वे बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रह सकें। सरकार ने इस पर अपनी नीतिगत दिशा स्पष्ट की है, लेकिन किसान संघ ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी असंगत प्रस्ताव पर सहमत नहीं होंगे। वे आशा करते हैं कि सरकार एक संतुलित समाधान निकालेगी जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हो।
भविष्य की दिशा और नीति सुझाव
किसान संघ ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश को दोगुना किया जाए। वे चाहते हैं कि नई कृषि तकनीक, जैसे ड्रिप इरिगेशन, सटीक कृषि और जैविक खेती के लिए सरकारी अनुदान बढ़ाया जाए। इसके अलावा, वे चाहते हैं कि कृषि उत्पादों के लिए एक राष्ट्रीय मूल्य निर्धारण तंत्र लागू किया जाए, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाया जा सके। सरकार को यह भी सुझाव दिया गया कि वे ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार करें और कृषि सहकारी समितियों को सशक्त बनाएं।
निष्कर्ष
किसानों का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि वे अपनी मांगों को सरकार के सामने दृढ़ता से रख रहे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में हुई यह बैठक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है। सरकार ने किसानों की मांगों को स्वीकार किया और एक समिति गठित करने का वादा किया, लेकिन किसानों ने अपनी अपेक्षाओं को स्पष्ट किया। यदि सरकार और किसान संघ के बीच संवाद और सहयोग जारी रहता है, तो कृषि नीतियों में वास्तविक बदलाव लाना संभव हो सकता है। यह बैठक यह दर्शाती है कि किसानों के हितों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, और सरकार को उनके मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।


