सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशाॅप में उपस्थित अतिथिगण

0
29
सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशाॅप में उपस्थित अतिथिगण

सहकारिता मंत्रालय द्वारा 8 अक्टूबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप ने देशभर के सहकारी संगठनों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रमुख व्यक्तियों को एकत्रित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सहकारी मॉडल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देना था। वर्कशॉप के दौरान विभिन्न सत्रों में सहकारियों के अनुभव, चुनौतियाँ और भविष्य की रणनीतियों पर गहन चर्चा हुई, जिसके तहत कई नवीन पहलें और नीतिगत सिफारिशें प्रस्तुत की गईं।

राष्ट्रीय सहकारिता के प्रमुख अतिथि और उनके योगदान

मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक, राष्ट्रीय सहकारिता परिषद के अध्यक्ष, राज्य के मुख्यमंत्री और कई प्रतिष्ठित उद्योगपतियों ने उपस्थित होकर सहकारी विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। विशेष रूप से, राष्ट्रीय सहकारिता परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि कैसे सहकारी मॉडल से किसानों और छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता और विपणन चैनल उपलब्ध कराए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण रोजगार सृजन के लिए सहकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित करने की घोषणा की, जबकि उद्योगपति ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहकारी उत्पादों की पहुँच बढ़ाने की पहल की।

वर्कशॉप के मुख्य सत्र और विषयगत चर्चाएँ सफल

सत्रों में ‘सहकारी वित्तीय प्रबंधन’, ‘सतत कृषि और सहकारी मॉडल’, ‘सामुदायिक आधारित पर्यटन’ और ‘स्मॉल एंड मिडियम एंटरप्राइज़ (SME) के लिए सहकारी समर्थन’ जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञ पैनल ने सहकारियों के वित्तीय डेटा का विश्लेषण करते हुए जोखिम प्रबंधन और पूंजी जुटाने के तरीकों पर व्यावहारिक सलाह दी। एक विशेष सत्र में डिजिटल सहकारी प्लेटफॉर्म पर चर्चा हुई, जहाँ बताया गया कि कैसे ब्लॉकचेन और मोबाइल एप्लिकेशन से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई जा सकती है।

सहकारिता के नवाचार मॉडल और उद्यमिता पर प्रकाश

सहकारी मॉडल के नए रूपों पर भी चर्चा की गई, जैसे ‘इको-कोऑपरेटिव’, ‘माइक्रो-फाइनेंस कोऑपरेटिव’ और ‘कृषि सहकारी-स्टार्टअप इकोसिस्टम’। उद्यमियों ने बताया कि सहकारी संरचना में नवाचार को कैसे प्रोत्साहित किया जा सकता है, और स्टार्टअप्स के लिए सहकारी नेटवर्क का उपयोग कैसे लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा, सहकारी संस्थाओं के बीच साझेदारी के मॉडल पर भी चर्चा हुई, जिससे संसाधनों का साझा उपयोग और लागत में कमी संभव हो सके।

भविष्य की योजनाएँ और नीति दिशा-निर्देश सहयोगी उन्नति

मंत्रालय ने इस वर्कशॉप के आधार पर ‘सहकारी विकास रोडमैप 2027-2030’ की घोषणा की, जिसमें सहकारी प्रशिक्षण, वित्तीय समावेशन, और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नीति निर्माताओं ने सहकारी संस्थाओं के लिए कर प्रोत्साहन, ऋण गारंटी योजनाएँ और प्रबंधन क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके अलावा, ‘सहकारी-उद्योग सहयोग मंच’ की स्थापना की योजना है, जिससे उद्योग और सहकारी के बीच तकनीकी और विपणन सहयोग को बढ़ावा मिले।

निष्कर्ष

दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप ने सहकारी आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी। उपस्थित अतिथियों के अनुभवों, नीति-निर्माताओं के प्रस्तावों और उद्योग के दृष्टिकोण ने सहकारी मॉडल को अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाया। भविष्य में, डिजिटल परिवर्तन, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता के साथ सहकारी संस्थाएँ ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि के प्रमुख इंजन बनेंगी। इस प्रकार, सहकारिता मंत्रालय की यह पहल न केवल सहकारी विकास को सुदृढ़ करेगी, बल्कि समग्र राष्ट्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।