किशनगंज-ठाकुरगंज-गलगलिया रेलखंड पर दोपहर में ट्रेन चलाने की मांग तेज, सांसद ने रेल मंत्री को लिखा पत्र

0
26
किशनगंज-ठाकुरगंज-गलगलिया रेलखंड पर दोपहर में ट्रेन चलाने की मांग तेज, सांसद ने रेल मंत्री को लिखा पत्र

किशनगंज-ठाकुरगंज-गलगलिया रेलखंड पर दोपहर में ट्रेन चलाने की मांग तेज़ी से बढ़ती जा रही है। इस क्षेत्र के निवासियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है, क्योंकि वर्तमान में केवल सुबह और शाम के समय ही ट्रेनें चलती हैं, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में बाधा उत्पन्न हो रही है। 13 अक्टूबर 2026 को इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया गया जब इस क्षेत्र के सांसद ने रेल मंत्री को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने इस खंड पर दोपहर में भी ट्रेन चलाने के लिए तात्कालिक कदम उठाने का आग्रह किया। इस लेख में हम इस मांग के पीछे की पृष्ठभूमि, सांसद की पहल, रेलवे विभाग की स्थिति और संभावित समाधान पर चर्चा करेंगे।

मध्याह्न रफ्तार की माँग: नागरिकों की आवाज़

किशनगंज से ठाकुरगंज और आगे गलगलिया तक का रेलखंड लगभग 120 किलोमीटर लंबा है, और इस पर रोज़ाना लगभग 30 यात्रियों का प्रवाह होता है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग मुख्यतः सुबह और शाम को ही ट्रेन का उपयोग करते हैं, जिससे दिन के मध्य में होने वाली व्यापारिक गतिविधियाँ, स्कूल की कक्षाएँ और चिकित्सा सेवाएँ प्रभावित होती हैं। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि दोपहर में ट्रेन न चलने के कारण उनकी बिक्री में कमी आ रही है, और स्कूल के छात्रों को भी समय पर कक्षा पहुँचने में कठिनाई होती है। इस प्रकार की शिकायतों के कारण नागरिकों ने एक जनसंचार अभियान शुरू किया, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बैठकों के माध्यम से अपनी मांग को उजागर किया।

संसद में उठी शिकायत: पत्र से मिली प्रतिक्रिया

संसद के सदस्य, जिन्होंने इस क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व किया, ने 13 अक्टूबर को रेल मंत्री को एक सशक्त पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि दोपहर में ट्रेन चलाने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सुरक्षा और सुविधा में भी सुधार होगा। सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि रेलवे विभाग द्वारा पहले भी इस खंड पर अतिरिक्त सेवाएँ जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था, परंतु बजट और तकनीकी कारणों से वह लागू नहीं हुआ। पत्र के अंत में सांसद ने रेल मंत्री से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता दें और एक कार्य योजना तैयार करें।

रेलवे विभाग की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ

रेलवे विभाग ने बताया कि इस खंड पर दोपहर में ट्रेन चलाने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की जाँच अभी भी जारी है। ट्रैक की स्थिति, स्टेशन पर प्लेटफ़ॉर्म की लंबाई, और सिग्नलिंग सिस्टम को सुधारने की आवश्यकता है। इसके अलावा, ट्रेन के संचालन के लिए अतिरिक्त डिवाइस और कर्मियों की भी आवश्यकता होगी। इन सभी कारकों के कारण लागत में वृद्धि हो सकती है, जिसे देखते हुए विभाग ने कहा कि वे एक विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन कर रहे हैं।

समाधान के संभावित मार्ग: नीति और निवेश

संसद सदस्य और रेलवे विभाग दोनों ने इस मुद्दे के समाधान के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। एक ओर, सरकार को इस खंड पर विशेष विकास कोष उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे ट्रैक और स्टेशन के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाया जा सके। दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी (PPP) मॉडल अपनाकर ट्रेन संचालन को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, समय-निर्धारण में लचीलापन लाकर दोपहर के समय भी ट्रेन चलाने के लिए उपयुक्त स्लॉट निर्धारित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

किशनगंज-ठाकुरगंज-गलगलिया रेलखंड पर दोपहर में ट्रेन चलाने की मांग नागरिकों की वास्तविक जरूरतों को दर्शाती है। सांसद की पहल और रेल मंत्री को लिखा पत्र इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि सरकार और रेलवे विभाग मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, लागत प्रबंधन और नीति समायोजन के माध्यम से इस मांग को पूरा करते हैं, तो यह क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाएगा। इस प्रकार, समय पर ट्रेन सेवा न केवल सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास का नया प्रेरक बन सकती है।