राज्यस्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक

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राज्यस्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक

राज्यस्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक 15 अक्टूबर 2026 को राजधानी के सत्र भवन में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के विविध क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करना और आगामी नीतिगत दिशा-निर्देशों पर चर्चा करना था। समिति के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक कार्यों के मंत्री, प्रमुख सरकारी अधिकारी और विशेषज्ञ सलाहकार भी उपस्थित थे। बैठक का प्रारम्भ राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत परियोजना रिपोर्टों के संक्षिप्त परिचय से हुआ, जिसके बाद समिति ने प्रत्येक क्षेत्र की कार्यान्वयन स्थिति पर गहन चर्चा की।

समीक्षा और रणनीति: समिति का मुख्य फोकस

बैठक के पहले सत्र में समिति ने पिछले वर्ष की प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की। विशेष रूप से ग्रामीण अवसंरचना, जल प्रबंधन और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्रों में प्रगति पर प्रकाश डाला गया। समिति ने बताया कि ग्रामीण सड़क नेटवर्क में 12,000 किलोमीटर की वृद्धि हुई है, जबकि जलाशयों के पुनर्निर्माण कार्य 75% पूर्ण हो चुके हैं। इसके अलावा, डिजिटल शिक्षा के लिए 50,000 नई ट्यूटोरियल्स और ऑनलाइन पाठ्यक्रम विकसित किये गए हैं। इस सत्र में समिति ने रणनीतिक लक्ष्यों को स्पष्ट किया और आगामी तिमाही के लिए प्राथमिकता सूचि तय की, जिससे कार्यान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता बनी रहे।

विधायी सुधारों पर चर्चा: नई नीतियों का आकलन

दूसरे सत्र में विधायी सुधारों पर चर्चा को प्राथमिकता दी गई। समिति ने स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्र में नवीनतम कानूनों के प्रभाव का विश्लेषण किया। विशेष रूप से, स्वास्थ्य क्षेत्र में “सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम” के संशोधन प्रस्ताव पर बहस हुई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर संसाधन और प्रबंधन ढाँचे उपलब्ध कराना है। शिक्षा क्षेत्र में “डिजिटल शिक्षा एवं प्रशिक्षण अधिनियम” के तहत स्कूलों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अनिवार्य प्रशिक्षण देने की योजना पर भी सहमति बनी। इस सत्र में समिति ने कानूनी ढाँचे में पारदर्शिता और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के उपाय सुझाए।

संकट प्रबंधन और जोखिम मूल्यांकन: तात्कालिक चुनौतियों का सामना

तीसरे सत्र में समिति ने संकट प्रबंधन और जोखिम मूल्यांकन पर चर्चा की। पिछले वर्ष के प्राकृतिक आपदाओं और महामारी के अनुभवों के आधार पर, समिति ने आपदा प्रबंधन योजनाओं को अद्यतन किया। विशेष रूप से, “संकट प्रतिक्रिया तंत्र” के तहत तेज़ी से संसाधन जुटाने और राहत कार्यों के लिए एक समन्वित प्लेटफ़ॉर्म स्थापित करने का निर्णय लिया गया। समिति ने जोखिम मूल्यांकन रिपोर्टों के आधार पर प्रमुख जोखिम क्षेत्रों की पहचान की और उन पर तत्काल कार्रवाई के लिए कार्य समूह गठित किये। इस सत्र ने यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में संभावित आपदाओं का सामना अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

भविष्य की योजनाएँ और कार्यान्वयन: दीर्घकालिक दृष्टिकोण

अंतिम सत्र में समिति ने भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। इसमें ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) के अनुरूप राज्य की दीर्घकालिक रणनीति को रूपरेखा दी गई। समिति ने ऊर्जा, जल संरक्षण और हरित परिवहन पर विशेष ध्यान देते हुए 2030 तक 40% नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य तय किया। साथ ही, सार्वजनिक कार्यों के डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को लागू करने का निर्णय लिया गया, जिससे परियोजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इस सत्र में कार्यान्वयन के लिए समय-सीमा और बजटीय आवंटन पर भी स्पष्ट निर्णय लिया गया।

निष्कर्ष

इस बैठक में समिति ने राज्य की प्रगति और चुनौतियों का समग्र आकलन किया, तथा भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किये। विधायी सुधार, संकट प्रबंधन, और सतत विकास के क्षेत्र में उठाए गए कदम राज्य को एक अधिक समावेशी और पारदर्शी प्रशासन की ओर अग्रसर करेंगे। समिति के निर्णयों के आधार पर आने वाले महीनों में योजनाओं के कार्यान्वयन से राज्य की समग्र विकास गति में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।