एसजीपीसी अध्यक्ष एचएस धामी परविंदर झाेटा के परिजनाें से मुलाकात करते हुए

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एसजीपीसी अध्यक्ष एचएस धामी परविंदर झाेटा के परिजनाें से मुलाकात करते हुए

एसजीपीसी अध्यक्ष श्री हरिशंकर धामी ने 17 अक्टूबर 2026 को परविंदर झाेटा के परिजनों से मुलाकात की, जो एक भावनात्मक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण घटना थी। यह यात्रा पंजाब के एक छोटे से गाँव में हुई, जहाँ धामी ने झाेटा परिवार के सदस्यों के साथ संवाद किया, उनके संघर्षों को समझा और उनके भविष्य के लिए आशा जगाई। इस कार्यक्रम ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से गहरी छाप छोड़ी, क्योंकि एसजीपीसी का नेतृत्व करने वाले धामी ने न केवल धर्म के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों के प्रति अपनी संवेदना भी प्रदर्शित की।

धामियों की भक्ति: एसजीपीसी अध्यक्ष की साक्षात्कार यात्रा

धामी जी ने परविंदर झाेटा के परिवार के साथ गहन बातचीत करते हुए अपने धार्मिक विश्वासों और सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे धर्म के माध्यम से समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस मुलाकात में धामी ने परिवार के सदस्यों को प्रेरित किया कि वे अपने धर्म और परंपरा को न केवल पालन करें, बल्कि उसे समाज के लिए एक सकारात्मक शक्ति के रूप में भी उपयोग करें।

परविंदर झाेटा के परिवार पर प्रभाव और भावनाएँ

परिजनों के अनुसार, धामी की उपस्थिति ने उन्हें मानसिक रूप से स्फूर्तिदायक अनुभव दिया। वे कहते हैं कि अध्यक्ष की संवेदनशीलता और उनके शब्दों ने उन्हें कठिन परिस्थितियों से निपटने की नई ऊर्जा दी। परिवार के सदस्यों ने यह भी साझा किया कि धामी ने उनके लिए एक आशा की किरण जलाई, जिससे वे अपने भविष्य के लिए योजनाएँ बना सकें।

धामियों का सामाजिक कार्य: गहरी जड़ें और भविष्य की योजनाएँ

धामी ने इस अवसर पर बताया कि कैसे एसजीपीसी के माध्यम से धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और जल प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने युवाओं को रोजगार के अवसरों से अवगत कराने के लिए कई पहलें शुरू करने की योजना का उल्लेख किया।

भविष्य की दिशा: एसजीपीसी और समाज का सहयोग

धामी ने इस मुलाकात में यह भी स्पष्ट किया कि एसजीपीसी का लक्ष्य केवल धार्मिक समृद्धि नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास पर केंद्रित है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि धर्म के मूल्यों के साथ-साथ सामाजिक न्याय, समानता और समृद्धि को भी बढ़ावा दिया जा सके।

निष्कर्ष

परविंदर झाेटा के परिवार से धामी की मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक नेतृत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की भलाई के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस प्रकार की पहल से यह स्पष्ट होता है कि धर्म और समाज के बीच एक गहरा और सकारात्मक संबंध बना हुआ है। एसजीपीसी की इस समर्पित कार्रवाई ने समाज में एक नई उम्मीद जगाई है, और यह दिखाया है कि कैसे धार्मिक नेतृत्व समाज के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।