मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मां दुर्गा की पूजा के बाद आशीर्वाद लेते हुए

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मां दुर्गा की पूजा के बाद आशीर्वाद लेते हुए

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 20 अक्टूबर 2026 को राज्य के प्रमुख मंदिर में मां दुर्गा की पूजा कर आशीर्वाद लेते हुए आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस भव्य आरती में हजारों भक्तों ने भाग लिया और मुख्यमंत्री ने अपनी आध्यात्मिक भक्ति और समाज के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया। कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से नव वर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए सभी के लिए समृद्धि और शांति की कामना की गई।

सम्राट चौधरी का आध्यात्मिक कार्यक्रम: मां दुर्गा की आरती

मंदिर के मुख्य हॉल में सुबह 6:30 बजे से ही पूजा आरम्भ हुई। मुख्यमंत्री ने प्रथम पंक्ति से आरती के गीतों की धुन पर भजन गाया, उसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने फूलों की अर्पण की। आरती के दौरान दीपक जलने की रौशनी ने पूरे परिसर को दिव्य प्रकाश से भर दिया।

राज्य के प्रमुख नेता और भक्तों का संगम

इस कार्यक्रम में न केवल मुख्यमंत्री, बल्कि राज्य के अन्य प्रमुख नेता, मंत्री तथा सरकारी कर्मचारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी पूजा के दौरान आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी को एक साथ मिलकर आशीर्वाद देने के लिए बुलाया, जिससे एकता और भाईचारे का संदेश स्पष्ट हुआ।

विशेष भक्ति कार्यक्रम में नववर्ष की शुभकामनाएँ सभी के लिए

पूजा के बाद एक विशेष भक्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें संगीत और नृत्य के साथ नव वर्ष की शुभकामनाएँ दी गईं। मुख्यमंत्री ने भाषण में बताया कि यह नया वर्ष सभी के लिए समृद्धि और स्वास्थ्य लेकर आएगा। उन्होंने सभी को समाज में शांति और सहिष्णुता के लिए आह्वान किया।

आशीर्वाद से भरी सभा: भविष्य के लिए आशा

आखिर में, मुख्यमंत्री ने सभी को आशीर्वाद लेने के लिए बुलाया। उन्होंने मां दुर्गा से प्रार्थना की कि वे सभी को बुद्धि, साहस और धैर्य दें ताकि वे अपने कार्यों में सफल हो सकें। सभा के दौरान उपस्थित सभी ने आशीर्वाद लेते हुए एकजुट होकर भविष्य के लिए आशा जताई।

निष्कर्ष

इस आध्यात्मिक कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न केवल अपनी व्यक्तिगत भक्ति को प्रकट किया, बल्कि समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी उजागर किया। मां दुर्गा की पूजा और आशीर्वाद के इस अवसर ने राज्य के सभी नागरिकों में एकजुटता और समृद्धि की भावना को प्रोत्साहित किया। इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट होता है कि आध्यात्मिकता और सार्वजनिक सेवा का संगम समाज के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है।