नूंह में विजय दशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन करते हुए।

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नूंह में विजय दशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन करते हुए।

विजय दशमी के उजाले में, नूंह के छोटे से गाँव ने एक परम्परागत परंतु भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया। 20 अक्टूबर 2026 को, गाँव के प्रमुखों ने रावण के बड़े पुतले को जलाने की रस्म अंजाम दी, जिससे गाँववासियों में एकता, शौर्य और धार्मिक विश्वास की भावना जागृत हुई। इस कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखा, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपने इतिहास और मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।

विजय दशमी पर नूंह में रावण पुतले का दहन

इस दिन की सुबह, गाँव के चौक पर एक बड़ी मेहराब बनाई गई, जिसके भीतर रावण का विशाल पुतला रखा गया। पुतले का निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा परंपरागत तरीकों से किया गया था, जिसमें लकड़ी और पुआल का इस्तेमाल हुआ। जब सूरज की पहली किरणें चौक को रोशन कर रही थीं, तो गाँव के बुजुर्गों ने पुतले पर तेल और धूप जलाई, और फिर उसे जलाने के लिए मशालें प्रज्वलित कीं। पुतले के जलने की आवाज़ और धुआँ गाँव के चारों ओर गूँजते हुए, विजय दशमी के उल्लास को और भी बढ़ा दिया।

सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का संगम आज

यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक उत्सव था, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक था। गाँव के सभी वर्गों के लोग, चाहे वे किसान हों, शिक्षक हों या युवा, सभी ने मिलकर पुतले के दहन में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान, स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक गीत-नृत्य प्रस्तुत किए, जबकि बुजुर्गों ने युवाओं को विजय दशमी के इतिहास और महात्म्य के बारे में बताया। इस तरह से नूंह के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को पुनः पुष्टि की और समाज में एकता की भावना को मजबूत किया।

समुदाय के प्रमुख व्यक्तियों की भूमिका और योगदान

गाँव के मुखिया और प्रमुख बुजुर्गों ने इस कार्यक्रम की योजना और आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पुतले के निर्माण के लिए स्थानीय कारीगरों को प्रेरित किया और कार्यक्रम के दौरान सभी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किये। इसके अलावा, गाँव की युवा समिति ने कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया और स्थानीय रेडियो स्टेशन का सहारा लिया। इस प्रयास से कार्यक्रम की पहुँच बढ़ी और नूंह के बाहर के लोगों को भी इस परम्परा के बारे में बताया गया।

भविष्य की योजनाएँ और संदेश: एक नई दिशा

विजय दशमी के इस कार्यक्रम के बाद, नूंह के ग्राम पंचायत ने निर्णय लिया कि अगले वर्ष के कार्यक्रम को और भी व्यापक और समावेशी बनाया जाएगा। वे पुतले के दहन के साथ-साथ एक सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन करेंगे, जिसमें लोक नृत्य, संगीत और शिल्पकारी की प्रदर्शनी होगी। इसके अलावा, वे ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए धन जुटाने का भी प्रस्ताव रखे हैं, ताकि गाँव की समग्र विकास की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा जा सके।

निष्कर्ष

नूंह में विजय दशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन सिर्फ एक परम्परागत रस्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम ने गाँववासियों के बीच एकता और गर्व की भावना को बढ़ाया, और युवा पीढ़ी को अपने इतिहास और मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया। भविष्य में भी इस परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए गाँव के प्रमुख और युवा समिति ने एक नई दिशा तय की है, जिससे नूंह की सांस्कृतिक धरोहर और समाजिक विकास दोनों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सके।