मोना अग्रवाल (फोटो-भारतीय खेल प्राधिकरण)

0
28
मोना अग्रवाल (फोटो-भारतीय खेल प्राधिकरण)

मोना अग्रवाल, भारतीय खेल जगत की नई धारा, ने 2026 में भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रमुख पद पर नियुक्ति के साथ अपने करियर में एक नया मोड़ लिया। पूर्व ओलंपिक साइक्लिस्ट और अब नीति निर्माता, मोना ने अपनी कड़ी मेहनत और दूरदर्शी सोच से खेल के क्षेत्र में समावेशिता और विकास को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। उनके नेतृत्व में, भारतीय खेल प्राधिकरण को नई ऊर्जा और दिशा मिलने की उम्मीद है, जिससे युवा खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ को बेहतर संसाधन और अवसर मिलेंगे।

मोना अग्रवाल: खेल की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

मोना अग्रवाल ने अपनी करियर की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में एक युवा साइक्लिस्ट के रूप में की, जब भारत में महिला एथलीटों के लिए कम अवसर थे। उन्होंने 1996 के ओलंपिक में भाग लेकर अपनी पहचान बनाई और 2000 के दशक में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लगातार जीत दर्ज की। अपनी सक्रियता के कारण, मोना ने कई महिला खिलाड़ियों को मार्गदर्शन दिया, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा कर सकीं।

भारतीय खेल प्राधिकरण में बदलाव के सूत्रधार

2026 में, मोना को भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने तत्कालीन बोर्ड को यह संदेश दिया कि खेल नीतियाँ केवल खेल परिणामों पर नहीं, बल्कि समावेशिता, स्वास्थ्य और शिक्षा पर आधारित होनी चाहिए। उनके प्रस्तावित ‘सभी के लिए खेल’ कार्यक्रम के तहत, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना है, जिससे हर बच्चे को समान अवसर मिल सके।

महिला खेलों में समावेशिता और विकास की रणनीति

मोना ने विशेष रूप से महिला खेलों के विकास के लिए ‘सशक्त महिला खेल पहल’ शुरू की। इस पहल के अंतर्गत, महिला कोचिंग कोटा बढ़ाने, महिला खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित प्रशिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने और आर्थिक सहायता योजनाएँ लागू करने का लक्ष्य है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया जाना चाहिए।

युवा खिलाड़ियों के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और प्रशिक्षण

मोना अग्रवाल ने डिजिटल युग में खेल विकास के लिए ‘ई-स्पोर्ट्स और एथलेटिक डेटा प्लेटफ़ॉर्म’ की शुरुआत की। इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से युवा खिलाड़ी अपनी प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं, कोचिंग सुझाव प्राप्त कर सकते हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, वे ऑनलाइन वर्चुअल कोचिंग सेशन भी आयोजित कर रहे हैं, जिससे दूरी की बाधा को समाप्त किया जा सके।

निष्कर्ष

मोना अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय खेल प्राधिकरण ने खेल के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है। समावेशिता, डिजिटल नवाचार और महिला खेलों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने भारतीय खेल जगत को एक नई दिशा दी है। यदि इस दिशा को जारी रखा जाए, तो निस्संदेह भारत अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी पहचान और भी मजबूत करेगा।