राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू ने 23 अक्टूबर 2026 को बस्तर जिले के मुरिया दरबार में भाग लेकर दशहरा के पवित्र पर्व को मानद रूप से मान्यता दी। यह आयोजन बस्तर के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में एक नया अध्याय लेकर आया, जहाँ स्थानीय समुदाय ने अपने परंपरागत रीति-रिवाज़ों के साथ-साथ आधुनिक राजनीति की एक झलक भी देखी। राष्ट्रपति के आगमन से यह स्पष्ट हुआ कि राज्य के दूरदराज हिस्सों को भी राष्ट्रीय स्तर पर समान महत्व दिया जा रहा है। इस समारोह में स्थानीय कारीगरों, संगीतकारों और नर्तकों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जबकि राष्ट्रपति ने अपने भाषण में समावेशी विकास और शिक्षा पर बल दिया।
बस्तर के मुरिया दरबार में राजसी माहौल और सांस्कृतिक रंग
बस्तर के मुरिया दरबार में सजी हुई रचनात्मक सजावट और पारंपरिक शिल्प ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजसी ढंग से सुसज्जित सिंहासन पर बैठे राष्ट्रपति ने अपने स्वागत भाषण में बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का जिक्र किया। यहाँ की लोककथाएँ, नृत्य और संगीत ने समारोह को एक अनोखा रंग दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक और आधुनिकता का संगम यहाँ सजीव रूप से दिखाई दे रहा है।
राष्ट्रपति का भाषण: समावेशी विकास और शिक्षा पर प्रकाश
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने अपने भाषण में समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बस्तर के सभी हिस्सों में पहुँचाना अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और स्वदेशी समुदायों के लिए योजनाओं की घोषणा की, जिससे वे राष्ट्रीय विकास योजनाओं से लाभान्वित हो सकें। उनके शब्दों ने स्थानीय लोगों में आशा और विश्वास की भावना पैदा की।
मुरिया दरबार में नृत्य-गीत और पारंपरिक कलाओं का शानदार प्रदर्शन
समारोह के दौरान मुरिया दरबार की पारंपरिक कलाओं का शानदार प्रदर्शन हुआ। स्थानीय नर्तकियों ने रंगीन पोशाकों में नृत्य किया, जबकि संगीतकारों ने बस्तर के लोकगीतों को आधुनिक धुनों के साथ प्रस्तुत किया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान किया और यह स्पष्ट किया कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त कर रही है।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी और सामाजिक एकजुटता का संदेश
समारोह में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। गाँव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएँ सभी ने मिलकर कार्यक्रम की सजावट और आयोजन में हिस्सा लिया। इस पहल ने यह दिखाया कि जब सभी वर्ग एक साथ आते हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। राष्ट्रपति के आगमन से यह स्पष्ट हुआ कि राष्ट्रीय नेतृत्व स्थानीय स्तर पर भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का बस्तर के मुरिया दरबार में दशहरा समारोह में भाग लेना एक ऐतिहासिक क्षण है। इस कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखा, बल्कि समावेशी विकास और शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी उजागर किया। बस्तर के लोगों के लिए यह एक गर्व का दिन था, और यह स्पष्ट करता है कि राष्ट्रीय नेतृत्व दूरदराज के क्षेत्रों को भी समान महत्व देता है, जिससे देश की एकता और समृद्धि में योगदान होता है।


