विश्व पोलियो दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अपील

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विश्व पोलियो दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अपील

विश्व पोलियो दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अपील

विश्व पोलियो दिवस 24 अक्टूबर 2026 को मनाया गया, जब राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य मंत्री और जनता से एकजुट होकर पोलियो के विरुद्ध अंतिम युद्ध लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत को अभी भी पोलियो के समाप्ति के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास और सतर्कता की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में पोलियो के इतिहास, वर्तमान स्थिति और भविष्य के लक्ष्यों पर प्रकाश डाला तथा सभी स्तरों पर जागरूकता और स्वच्छता के महत्व पर बल दिया।

पोलियो के विरुद्ध नई चुनौती: मुख्यमंत्री की आवाज़

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन दशकों में भारत ने पोलियो के मामलों में जबरदस्त गिरावट देखी है, परंतु अभी भी कुछ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बची हुई संक्रमण की संभावना है। उन्होंने कहा, “पोलियो एक ऐसा रोग है जिसे हम विज्ञान और सामूहिक प्रयास से समाप्त कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2025 तक पोलियो को विश्व स्तर पर समाप्त करने का लक्ष्य है, और भारत को इस लक्ष्य को पाने के लिए अपनी नीतियों को तेज़ करना होगा। इस अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे वैक्सीनेशन के प्रति सजग रहें और अपने परिवारों को भी वैक्सीन के प्रति जागरूक करें।

भारत की प्रगति और अभी भी बाकी चुनौतियाँ

डॉ. मोहन यादव ने आँकड़ों के साथ अपनी अपील को सुदृढ़ किया। उन्होंने बताया कि 2020 से 2025 के बीच भारत में केवल 12 मामलों की रिपोर्ट मिली, जबकि 2018 में 56 मामलों की सूचना थी। फिर भी, कुछ जिलों में वैक्सीन कवरेज 70% से कम है। उन्होंने यह भी बताया कि पोलियो के खिलाफ लड़ाई में शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि सरकार और समाज एकजुट होकर इन चुनौतियों का सामना करे, तो पोलियो का खतरा समाप्त हो जाएगा।

डॉ. मोहन यादव का संदेश: सामूहिक प्रयास से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह बात कही कि पोलियो से मुक्ति का मार्ग केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी पर भी निर्भर करता है। उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों को वैक्सीनेशन अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए बुलाया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि “हर बच्चे को वैक्सीन का लाभ मिलना चाहिए, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण।” इसके अलावा, उन्होंने स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण और वैक्सीन की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का वादा किया।

सार्वजनिक स्वास्थ्य में भविष्य की दिशा: शिक्षा और जागरूकता

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि पोलियो के खिलाफ लड़ाई में शिक्षा और जागरूकता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि “साक्षरता और स्वास्थ्य शिक्षा से ही हम रोग के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ा सकते हैं।” उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को यह निर्देश दिया कि वे स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में पोलियो और वैक्सीन के बारे में सूचनात्मक कार्यक्रम चलाएँ। साथ ही, उन्होंने निजी क्षेत्र और नागरिक समाज से सहयोग की अपील की, ताकि वैक्सीन के वितरण में कोई बाधा न आए।

निष्कर्ष

डॉ. मोहन यादव की विश्व पोलियो दिवस पर की गई अपील ने यह स्पष्ट किया कि पोलियो के समाप्ति का लक्ष्य केवल एक आकांक्षा नहीं, बल्कि एक संभव वास्तविकता है। सरकार, स्वास्थ्य कर्मी, समाज और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से भारत और विश्व पोलियो से मुक्त हो सकता है। यह अपील एक प्रेरक संदेश है कि हमें विज्ञान, शिक्षा और जागरूकता के साथ मिलकर पोलियो को इतिहास की किताबों में समेटना चाहिए।