एनडीआरएफ टीम ने 26 अक्टूबर 2026 को बिहार के पटना जिले के मुहूर्त गांव में भयंकर बाढ़ के बीच तेज़ी से बचाव कार्यवाही शुरू की। भारी वर्षा के कारण नालों और नदियों के पानी का स्तर आसमान छू चुका था, जिससे हजारों परिवारों को अपने घरों से निकलना पड़ा। इस आपदा के दौरान एनडीआरएफ की त्वरित प्रतिक्रिया ने न केवल जीवन बचाए बल्कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में आशा और विश्वास भी जगाया।
बाढ़ के बीच नयी उम्मीद: एनडीआरएफ की त्वरित प्रतिक्रिया
एनडीआरएफ के जवानों ने सुबह 6 बजे ही बचाव अभियान शुरू किया। 20 किलोमीटर लंबी बाढ़ग्रस्त सड़क पर पैदल और राफ्ट के सहारे, वे 15 किमी दूर स्थित पीड़ित परिवारों तक पहुंचे। टीम ने त्वरित रूप से आपातकालीन शिविर स्थापित कर भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। राज्य सरकार के प्रमुख ने एनडीआरएफ के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा, “आपके बिना हम इस आपदा का सामना नहीं कर पाते।”
सफल बचाव अभियान: आज 30 परिवारों का उद्धार
एनडीआरएफ की टीम ने आज 30 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। बचाव के दौरान 12 बाढ़ग्रस्त घरों से बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिक चिकित्सा के साथ निकाला गया। टीम के प्रमुख, डॉ. अंशुमान पाटिल ने कहा, “हमारा लक्ष्य था कि कोई भी जीवन जोखिम में न पड़े।” बचाव के बाद, एनडीआरएफ ने आपातकालीन आश्रय स्थल पर पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध कराईं।
प्रशिक्षण में नई तकनीक: स्वचालित बचाव उपकरण सिखाया
संकट के बाद एनडीआरएफ ने अपने जवानों को स्वचालित बचाव उपकरणों के उपयोग में प्रशिक्षित किया। टीम ने एक नई तरह के जलरोधक रोबोटिक राफ्ट का परीक्षण किया, जिसे तेज़ी से पानी में तैनात किया जा सकता है। इस उपकरण की सहायता से बचाव कार्य अधिक सुरक्षित और तेज़ हो सकेगा। प्रशिक्षक ने बताया, “इस तकनीक से हम भविष्य में किसी भी बाढ़ या आपदा में और बेहतर तैयारी कर सकेंगे।”
समर्पण और सेवा: एनडीआरएफ के जवानों की कहानी
एनडीआरएफ के जवानों की कहानी में समर्पण, साहस और सेवा की मिसाल है। टीम के 12 जवानों ने बिना किसी आराम के पूरे दिन बचाव कार्य किया, जिससे 200 से अधिक लोगों के जीवन में बचाव की कहानी लिखी। उनके साथ ही, एनडीआरएफ के साथ काम कर रहे स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी अपनी भूमिका निभाई, जिससे बचाव कार्य और भी समन्वित हुआ।
निष्कर्ष
एनडीआरएफ टीम ने 26 अक्टूबर 2026 को पटना जिले में बाढ़ आपदा के दौरान दिखाया कि कैसे तेज़ी से प्रतिक्रिया, नई तकनीक और समर्पित सेवा एक आपदा को कम कर सकती है। उनके प्रयासों ने न सिर्फ़ जीवन बचाए, बल्कि ग्रामीण समुदाय में आशा और विश्वास भी जगाया। यह उदाहरण है कि राष्ट्रीय स्तर की आपदा प्रतिक्रिया टीमें कैसे अपने साहस और पेशेवर कौशल से समाज की भलाई के लिए कार्य कर सकती हैं।


