पशु चिकित्सा और पशुधन संरक्षण में भी राजस्थान देशभर में अग्रणी बने: राज्यपाल

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पशु चिकित्सा और पशुधन संरक्षण में भी राजस्थान देशभर में अग्रणी बने: राज्यपाल

राजस्थान, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और विशाल पशुपालन परंपराओं के लिए जाना जाता है, ने पशु चिकित्सा और पशुधन संरक्षण के क्षेत्र में भी देशभर में एक नया मानक स्थापित किया है। राज्यपाल ने हाल ही में कहा कि इस क्षेत्र में राजस्थान की प्रगति न केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल बन चुकी है। यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए समग्र विकास मॉडल, नवीन तकनीकों के उपयोग और किसानों व पशुपालकों के साथ घनिष्ठ सहयोग का परिणाम है।

राजस्थान की पशु चिकित्सा में नवाचार और प्रगति

राजस्थान ने पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ‘राष्ट्रव्यापी पशु स्वास्थ्य मिशन’ के तहत कई पहल शुरू की हैं। 2024-25 में शुरू हुई ‘टेली-वेटरिनरी’ सेवा ने ग्रामीण पशुपालकों को मोबाइल ऐप के माध्यम से विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराई, जिससे रोग निदान समय पर हो रहा है। इसके अलावा, ‘रॉयल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम’ के तहत 30 लाख पशुओं को वैक्सीनेशन दिया गया, जिससे रोग नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

पशुधन संरक्षण के लिए सरकारी योजनाओं का प्रभाव

राजस्थान सरकार ने ‘पशुधन संरक्षण एवं विकास योजना’ के अंतर्गत पशुपालकों को सब्सिडी, बीमा और प्रजनन सहायता प्रदान की है। 2025 में जारी ‘स्मॉल एग्रीकल्चर डिवेलपमेंट एक्ट’ के तहत छोटे और मध्यम पशुपालकों को 15% ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई। इन योजनाओं के चलते राज्य में गाय, भैंस, बकरी और मुर्गी पालन की संख्या में 18% की वृद्धि हुई है।

टेक्नोलॉजी से रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य निगरानी

डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म ‘वेटरिनरी हेल्थ नेटवर्क’ के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य डेटा को एक केंद्रीकृत डेटाबेस में संग्रहित किया जाता है। यहाँ एआई आधारित एल्गोरिदम रोग के प्रारंभिक संकेतों को पहचानते हैं, जिससे पूर्व-चेतावनी और त्वरित उपचार संभव होता है। इसके अलावा, ‘ड्रोन सर्विलांस’ से पशु चराई क्षेत्रों की निगरानी की जाती है, जिससे चोरी और रोग फैलने के ख़तरे को कम किया जाता है।

राष्ट्रीय मॉडल के रूप में राजस्थान की भूमिका

राजस्थान की इन पहलों को केंद्र सरकार और अन्य राज्यों ने सराहा है। ‘राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य परिषद’ ने इस मॉडल को ‘राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने योग्य’ बताया। राज्य के पशु चिकित्सक और प्रशिक्षित पशुपालक राष्ट्रीय कार्यशालाओं में हिस्सा लेकर अन्य राज्यों के साथ अनुभव साझा कर रहे हैं। इसके अलावा, ‘राष्ट्रव्यापी पशु चिकित्सा अकादमी’ को राजस्थान के एक प्रमुख शहर में स्थापित किया गया है, जो देशभर के छात्रों को प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

निष्कर्ष

राजस्थान की पशु चिकित्सा और पशुधन संरक्षण में की गई प्रगति न केवल राज्य की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देती है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार के लिए भी एक महत्वपूर्ण आधारशिला बन गई है। राज्यपाल के शब्दों में, “राजस्थान ने साबित कर दिया है कि समर्पण, नवाचार और सहयोग से हम किसी भी क्षेत्र में अग्रणी बन सकते हैं।” इस संदेश को आगे बढ़ाते हुए, राजस्थान अपने अनुभव और सफलता को देशभर में फैलाने के लिए तत्पर है, जिससे भारत के सभी पशुपालक और किसान लाभान्वित हो सकें।