संस्कृत शिक्षा सचिव

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संस्कृत शिक्षा सचिव

संस्कृत शिक्षा सचिव के पद पर नई नियुक्ति के साथ सरकार ने भारतीय शास्त्रीय भाषा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दृढ़ किया है। 29 अक्टूबर 2026 को घोषित इस निर्णय से संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और नवीन नीतियाँ लाने की उम्मीद जताई जा रही है।

नई नियुक्ति: संस्कृत शिक्षा सचिव के रूप में डॉ. आर. के. शर्मा

डॉ. आर. के. शर्मा, जो कि संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में 25 वर्षों के अनुभव के साथ एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं, को संस्कृत शिक्षा सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि में दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में पीएच.डी. और कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुति शामिल है।

संस्कृत शिक्षा के लिए नई रणनीति और पाठ्यक्रम सुधार

सचिव डॉ. शर्मा ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि संस्कृत को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में एकीकृत किया जाए और इसे नयी पीढ़ी के लिए सुलभ बनाया जाए।” उन्होंने 2027 से लागू होने वाले “संस्कृत शिक्षण एवं शोध पहल” के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला, जिसमें डिजिटल संसाधन, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन पाठ्यक्रम शामिल हैं।

सरकार का समर्थन और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका

प्रधानमंत्री ने इस नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “संस्कृत हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इसे जीवित रखने के लिए हमें नई पीढ़ी को प्रेरित करना होगा।” राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और राज्य स्तर के संस्थानों ने भी इस पहल का समर्थन किया है, और वे नए पाठ्यक्रम के लिए संसाधन साझा करने का वादा किया है।

शिक्षकों और छात्रों की प्रतिक्रिया

साक्षात्कार में शिक्षकों ने कहा कि नई नीतियाँ “शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और छात्रों को प्रेरित करने” में मदद करेंगी। छात्रों ने भी आशा व्यक्त की कि संस्कृत सीखना आसान और रोचक बन जाएगा, जिससे वे अपनी जड़ें और पहचान को बेहतर समझ सकेंगे।

निष्कर्ष

संस्कृत शिक्षा सचिव के पद पर डॉ. आर. के. शर्मा की नियुक्ति भारतीय शास्त्रीय भाषा के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नई रणनीति, डिजिटल संसाधन और शिक्षकों का प्रशिक्षण, संस्कृत को आधुनिक शिक्षा के भीतर एक प्रमुख स्तम्भ बना देंगे। इस कदम से संस्कृत के अध्ययन में नई ऊर्जा और रुचि जगने की उम्मीद है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करेगा।