मंत्री पीयूष हजारिका ने 30 अक्टूबर 2026 को पश्चिम कार्बी आंगलोंग के विकास कार्यों की समीक्षा के बाद जैतून की खेती की पायलट परियोजना की शुरुआत की। इस ऐतिहासिक कदम से क्षेत्र के कृषि क्षेत्र में नए आयाम खुलने की उम्मीद है।
पश्चिम कार्बी आंगलोंग में विकास कार्यों की समीक्षा
मंत्री ने क्षेत्र के प्रमुख पथ, जल संरक्षण परियोजनाओं और स्कूलों के नवीनीकरण की जांच की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष में 12 नई सड़कें और 8 जलाशयों का निर्माण पूरा हुआ है। साथ ही, 15 ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई है, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं।
जैतून की खेती: नई पायलट परियोजना का आरंभ
जैतून के बीजों को 500 हेक्टेयर में रोपण के लिए योजना बनाई गई है। परियोजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण, उन्नत कृषि उपकरण और वैज्ञानिक सलाह प्रदान की जाएगी। यह पायलट परियोजना क्षेत्र में जैव विविधता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
किसानों के लिए आर्थिक लाभ और सतत कृषि
जैतून की खेती से किसानों को 12% की अधिक आय प्राप्त होगी। इसके अलावा, जैतून के तेल का उत्पादन कर उन्हें निर्यात बाजार में भी प्रवेश मिलेगा। परियोजना के दौरान पर्यावरणीय अनुकूल खेती पद्धति अपनाई जाएगी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और जल उपयोग कम होगा।
भविष्य के लिए रणनीति और समर्थन योजनाएं
मंत्री ने बताया कि सरकार 20% तक की सब्सिडी और 10% तक ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसके अतिरिक्त, कृषि विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर अनुसंधान और विकास केंद्र स्थापित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में कृषि नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
निष्कर्ष
इस पायलट परियोजना से पश्चिम कार्बी आंगलोंग के ग्रामीण समाज में आर्थिक समृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन दोनों की आशा बढ़ गई है। मंत्री पीयूष हजारिका के नेतृत्व में यह पहल न केवल कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक नई मिसाल कायम करेगी।


