रायपुर के पत्रकारों के दिलों में गहरी उदासी के साथ, आकाशवाणी समाचार शाखा के उपनिदेशक तथा रायपुर प्रेस क्लब के प्रतिष्ठित सदस्य स्वर्गीय विकल्प शुक्ला का निधन हो गया। 31 अक्टूबर 2026 को शनिवार को रायपुर प्रेस क्लब में उनके लिए एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ पत्रकारों, रेडियो कर्मियों और समाज के अन्य सम्मानित व्यक्तियों ने मिलकर उनकी याद में आँसू बहाए और उनके योगदान को सलाम किया।
विकल्प शुक्ला: पत्रकारिता के आदर्श वाणी
विकल्प शुक्ला ने आकाशवाणी की समाचार शाखा में अपने कार्यकाल के दौरान सटीकता, सत्यनिष्ठा और पेशेवरता के नए मानक स्थापित किए। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की लाइव कवरेज का नेतृत्व किया, जिससे आकाशवाणी की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उनकी नयी सोच और नवाचारी रिपोर्टिंग शैली ने युवा पत्रकारों को प्रेरित किया और उन्हें एक आदर्श बनाया।
रायपुर प्रेस क्लब में श्रद्धांजलि का आयोजन
रायपुर प्रेस क्लब के भव्य सभागार में शुक्ला के लिए एक विशेष स्मृति समारोह आयोजित किया गया। क्लब के अध्यक्ष और अन्य प्रमुख सदस्य, साथ ही आकाशवाणी के वरिष्ठ पत्रकार, उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत में क्लब के अध्यक्ष ने शुक्ला के कार्य और योगदान पर प्रकाश डाला, उसके बाद एक भावपूर्ण पंक्ति में शोक संदेश सुनाया गया।
भावभीनी भाषण और स्मृति गीत
कार्यक्रम के दौरान, शुक्ला के करीबी सहयोगी और मित्र ने एक मार्मिक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने शुक्ला के व्यक्तित्व, कार्य नैतिकता और उनके द्वारा लिखे गए लेखों का उल्लेख किया। उसके बाद, क्लब के सदस्यों ने एक यादगार स्मृति गीत गाया, जिससे सभी उपस्थित लोगों के दिलों में शुक्ला के प्रति गहरी श्रद्धा जागी।
शुक्ला की विरासत और आगे की राह
विकल्प शुक्ला के निधन के बावजूद, उनकी शिक्षाएं और कार्य शैली अभी भी आकाशवाणी और रायपुर प्रेस क्लब के पत्रकारों के बीच जीवित हैं। क्लब ने एक नया ‘विकल्प शुक्ला स्मृति पुरस्कार’ स्थापित किया, जिससे युवा पत्रकारों को उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पुरस्कार के माध्यम से शुक्ला की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
निष्कर्ष
विकल्प शुक्ला की याद हमेशा आकाशवाणी और रायपुर प्रेस क्लब के दिलों में ताज़ा रहेगी। उनका कार्य, समर्पण और पत्रकारिता के प्रति उनकी अटल प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी। उनके निधन के बाद भी, उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत को सम्मानित करने के लिए यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमें याद दिलाता है कि सत्य और न्याय की खोज में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जाएगा।


