मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने और हरित विकास योजनाओं पर गहन संवाद स्थापित करना था। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ अपने-अपने राज्यों और केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए, भविष्य के सहयोग के लिए ठोस योजनाएँ तैयार कीं। इस कार्यक्रम ने दिखाया कि भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक ऊँचाइयाँ पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास के प्रति कितनी प्रतिबद्ध हैं।
साक्षरता से भरी बैठक: नीति और दृष्टिकोण का संगम
बैठक के दौरान, पुष्कर सिंह धामी ने वन संरक्षण के महत्व पर ज़ोर देते हुए बताया कि “वन हमारा जीवनदायिनी है, और इसे सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी हम सभी पर है।” भूपेंद्र यादव ने इसके साथ सहमति व्यक्त करते हुए “केंद्रीय सरकार की वन नीति को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए हमें राज्य सरकारों के साथ निकट सहयोग की आवश्यकता है” कहा। दोनों नेताओं ने यह भी चर्चा की कि कैसे डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से वन संरक्षण की निगरानी बेहतर की जा सकती है, जिससे वन्य जीवों और उनके आवासों की रक्षा हो सके।
हरित ऊर्जा पर नई पहल: ऊर्जा और पर्यावरण का संगम
बैठक के दौरान ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में भी कई पहल पर चर्चा हुई। पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उत्तराखंड में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 2025 तक 5 गीगावाट की क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। भूपेंद्र यादव ने केंद्रीय स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ‘ग्रीन इंडिया’ पहल के तहत नई योजनाओं की घोषणा की। दोनों पक्षों ने यह सहमति जताई कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता देते हुए, वन संरक्षण को भी अनुकूलित किया जाना चाहिए।
जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति: नीति और कार्यान्वयन
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा करते हुए, पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की और जल संरक्षण योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। भूपेंद्र यादव ने केंद्रीय स्तर पर ‘क्लाइमेट रेसिलियंस प्लान’ के तहत जलवायु अनुकूलन उपायों की रूपरेखा पेश की। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में ‘ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर’ का विकास प्राथमिकता होनी चाहिए।
सहयोग के नए आयाम: राज्य-केन्द्रीय साझेदारी का विस्तार
बैठक के अंत में, पुष्कर सिंह धामी और भूपेंद्र यादव ने राज्य-केन्द्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति व्यक्त की। इस समूह का कार्यक्षेत्र वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, और हरित विकास परियोजनाओं पर केंद्रित रहेगा। दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि इस सहयोग के माध्यम से उत्तराखंड और पूरे भारत में ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) को प्राप्त किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
इस बैठक ने दिखाया कि पर्यावरणीय नीति और राज्य-केन्द्रीय सहयोग के बीच एक मजबूत तालमेल संभव है। पुष्कर सिंह धामी और भूपेंद्र यादव के बीच हुई गहन चर्चा ने वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई योजनाओं और सहयोग के नए आयामों को जन्म दिया। यह कदम भारत को पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।


