अमृतसर सेंट्रल जेल में महिला कैदियों और उनके बच्चों के साथ दिवाली मनाई

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अमृतसर सेंट्रल जेल में महिला कैदियों और उनके बच्चों के साथ दिवाली मनाई

अमृतसर सेंट्रल जेल में 7 नवंबर 2026 को दिवाली की रौशनी ने कैदियों के भीतर एक नई आशा की किरण जगाई। इस वर्ष, जेल प्रशासन ने महिला कैदियों और उनके बच्चों को एक साथ दिवाली मनाने का अनूठा अवसर दिया, जिससे न केवल त्योहार के पवित्र अर्थ को महसूस किया गया, बल्कि पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी उठाया गया। दिवाली का संदेश है अंधकार पर प्रकाश की जीत, और यह कार्यक्रम इसी संदेश को कैदियों के दिलों में उतारने के प्रयास का प्रतीक था।

सजाया गया कैद परिसर: दीपों की रोशनी में उम्मीद

जेल परिसर को रंगीन रौशनी और लालटेन से सजा दिया गया। जेल के प्रमुख ने बताया कि इस वर्ष की दिवाली में विशेष रूप से महिला कैदियों और उनके बच्चों के लिए एक अलग क्षेत्र तैयार किया गया। वहाँ पर पारंपरिक दीपक, माला और छोटे-छोटे लालटेन जलाए गए, जिससे कैदियों के चेहरे पर मुस्कुराहट लौट आई। कैदियों ने स्वयं हाथ से रौशनी के लिए मोमबत्तियाँ बनाई, जिससे उनकी रचनात्मकता और स्वाभिमान में वृद्धि हुई।

परिवार के साथ मिलकर मनाया गया पवित्र त्योहार

इस दिवाली पर कैदियों को अपने बच्चों के साथ समय बिताने का मौका मिला। जेल के भीतर एक विशेष कक्ष में परिवार के सदस्यों को बैठकर एक साथ मिठाइयाँ बाँटने, गीत गाने और नृत्य करने की व्यवस्था की गई। एक कैदी ने भावुक होकर कहा, “मैं अपनी बेटी के साथ यह दिन मना पाकर बहुत खुश हूँ। यह हमारे लिए एक नया अध्याय है।” बच्चों ने भी अपने पापा के साथ मिलकर छोटी-छोटी रौशनी के लिए मोमबत्तियाँ बनाई, जिससे उनके चेहरे पर खुशी की चमक दिखी।

सुधारात्मक कार्यक्रमों के बीच सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव

जेल प्रशासन ने इस दिवाली के दौरान एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया। कैदियों ने पारंपरिक नृत्य और लोकगीत प्रस्तुत किए, जबकि जेल के कर्मचारी और कैदियों ने मिलकर एक छोटी नाटक प्रस्तुत की, जिसमें पुनर्वास और समाज में पुनः समावेश के विषय पर प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम ने न केवल कैदियों की सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाई, बल्कि उन्हें समाज में फिर से शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

भविष्य की दिशा में एक कदम: शिक्षा और पुनर्वास

इस दिवाली के दौरान जेल ने शिक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों पर भी ज़ोर दिया। कैदियों को विशेष कार्यशालाएँ और व्यावसायिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जहाँ उन्होंने रसोई कला, सिलाई और कंप्यूटर कौशल सीखने का अवसर पाया। जेल के प्रमुख ने कहा, “हमारा लक्ष्य कैदियों को समाज में पुनः समावेश के लिए तैयार करना है, और यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

निष्कर्ष

अमृतसर सेंट्रल जेल में दिवाली का यह अनूठा आयोजन कैदियों और उनके बच्चों के लिए एक नई उम्मीद का प्रतीक बन गया। दीपों की रोशनी में न केवल अंधकार दूर हुआ, बल्कि कैदियों के मन में भी पुनर्वास और समाज में पुनः समावेश की नई आकांक्षाएँ जगाईं। इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट होता है कि जेल प्रशासन की प्रतिबद्धता केवल कैदियों को बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में फिर से शामिल करने के लिए शिक्षा, सांस्कृतिक समृद्धि और पुनर्वास के माध्यम से समर्थन देने तक विस्तारित है।