मुख्य सचिव को तत्काल निलंबित करे सरकार : बिक्रम ठाकुर

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धर्मशाला, 24 अप्रैल (हि.स.)। वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व मंत्री एवं जसवां-प्रगपुर से विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने प्रदेश के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई और तत्काल निलंबन की मांग की है। यहां जारी प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि एक सेवा विस्तार पर बैठे वरिष्ठ अधिकारी न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि जनता को गुमराह करने का प्रयास भी कर रहे हैं। ठाकुर ने कहा कि एक अधिकारी का कर्तव्य जनता की सेवा करना होता है, न कि निजी रुतबे और राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति करना। लेकिन मुख्य सचिव का व्यवहार पद की गरिमा के सर्वथा विपरीत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में आयोजित एक निजी आयोजन में मुख्य सचिव और उनकी पत्नी का नाम निमंत्रण कार्ड पर छपा था। यह कार्यक्रम कथित तौर पर अधिकारियों की बैठक बताया गया लेकिन सच्चाई यह है कि उस आयोजन में कई कारोबारी और गैर-सरकारी लोग भी मौजूद थे जो वायरल तस्वीरों और वीडियो में साफ दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा कि जब इस कार्यक्रम की आलोचना शुरू हुई तो मुख्य सचिव ने इससे किनारा करते हुए इसे केवल अधिकारियों की बैठक बताया। यह बयान न केवल असत्य है, बल्कि सरकारी पद का दुरुपयोग और जनता के विश्वास के साथ धोखा है।

बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि जब एक वरिष्ठ अधिकारी यह कहे कि लोग सिस्टम को नहीं जानते तो यह उनके अंदर पनप रहे सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। ऐसे अधिकारियों की सोच लोकतंत्र और पारदर्शिता के लिए खतरा है।

ठाकुर ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर इस पूरे मामले में सरकार मूकदर्शक बनी रहती है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि ऐसे अधिकारियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने चेताया कि भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और इस तरह के गैर-जवाबदेह रवैये को बेनकाब करेगी।

उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से मुख्य सचिव को उनके पद से निलंबित करे और निष्पक्ष जांच शुरू करे, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहे।

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