गोस्वामी अंजन कुमार गोविंद देवजी मंदिर के एकल सेवारत महंत

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जयपुर, 26 मई (हि.स.)। शहर के अतिरिक्त जिला न्यायालय क्रम- 4 महानगर द्वितीय ने गोविंद देवजी मंदिर के एकल सेवारत महंत के रूप में मृतक प्रद्युम्न कुमार गोस्वामी के स्थान पर गोस्वामी अंजन कुमार का नाम अंकित करने को कहा है। अदालत ने यह आदेश गोस्वामी अंजन कुमार के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए।

पीठासीन अधिकारी नीलम करवा ने मामले में अंजन कुमार और ब्रिगेडियर सवाई भवानी सिंह की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि सेवारत महंतों के उत्तराधिकार को ज्येष्ठाधिकार रीति से ही नियुक्त किया जाता है। वहीं राजस्थान लोक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के तहत अंजन कुमार ही ज्येष्ठाधिकार के उत्तराधिकार का तरीका होने के आधार पर एकल कार्यवाहक प्रन्यासी नियुक्त होने का अधिकारी है।

प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता सुरुचि कासलीवाल ने अदालत को बताया कि सहायक देवस्थान आयुक्त ने सितंबर, 1972 को निर्णित किया कि ठिकाना मंदिर गोविन्द देवजी एक सार्वजनिक प्रन्यास है और उसके कार्यवाहक प्रन्यासी प्रद्युम्न कुमार गोस्वामी है। कार्यवाहक प्रन्यासी के उत्तराधिकार का तरीका ज्येष्ठाधिकार है। इस आदेश के खिलाफ एक अपील देवस्थान आयुक्त के समक्ष पेश की। आयुक्त ने फरवरी, 1977 को अपील का निस्तारण कर दिया। इसके तहत प्रार्थी के पिता को एकल कार्यवाहक प्रन्यासी माना गया। वहीं दिसंबर, 1977 में उनका निधन हो गया। ऐसे में प्रार्थी ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण मंदिर का एक मात्र सेवायत महंत है। पिता की मौत होने पर प्रार्थी ने अपने आप को एकल प्रन्यासी घोषित करने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया था। सहायक देव स्थान आयुक्त ने प्रार्थना पत्र के खिलाफ पेश आपत्तियों को तय करते हुए साल 1999 में प्रार्थी के पक्ष में फैसला दिया और यह भी निर्देश दिया गया कि नवीन कार्यवाहक प्रन्यासी की नियुक्ति के लिए तीस दिन में जिला अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया जाए। अत: अंजन कुमार ने दिसंबर, 1999 में प्रार्थना पत्र पेश कर प्रद्युम्न कुमार के स्थान पर उसका नाम अंकित करने की गुहार की। वहीं इस प्रार्थना पत्र का उसके भाई ओधेश कुमार व अनुज कुमार के साथ ही बिग्रेडियर सवाई भवानी सिंह ने विरोध किया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थी का नाम एकल सेवारत महंत के रूप में अंकित करने को कहा है।

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