मत्स्य बीज में आत्मनिर्भर बना कांकेर! 34 हैचरियों से सरप्लस उत्पादन, देशभर में भेजा जा रहा बीज

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कांकेर, 19 जून — छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मत्स्य बीज उत्पादन में क्रांतिकारी प्रगति की है। पहले जहां यह जिला बीज के लिए पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश पर निर्भर था, वहीं आज 34 संचालित हैचरियों से न सिर्फ सरप्लस उत्पादन हो रहा है, बल्कि बीज देशभर में सप्लाई किया जा रहा है।

पखांजूर क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और मेहनतकश मत्स्य कृषकों की बदौलत आज यहां से प्रतिदिन 10-15 पिकअप वाहन बीज लेकर छत्तीसगढ़ सहित आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, यूपी, एमपी, झारखंड, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों को रवाना होते हैं।

2025-26 में 337 करोड़ स्पॉन और 128.35 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राय का उत्पादन लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 192 करोड़ स्पॉन और 7.42 करोड़ फ्राय का उत्पादन हो चुका है। यहां मेजर कार्प के साथ-साथ पंगेसियस बीज भी तैयार हो रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और मेहनतकश मछुआरों की मेहनत का परिणाम है।

कांकेर की यह सफलता नीली क्रांति को धरातल पर लाकर देशभर के मत्स्य कृषकों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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