मरणोपरांत नेत्रदान: बिमला देवी भंसाली ने रोशन की कई ज़िंदगियाँ

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बिमला देवी भंसाली का मरणोपरांत नेत्रदान

अररिया के फारबिसगंज में मरणोपरांत नेत्रदान की एक प्रेरक घटना सामने आई। जुलाई में किशनलाल भंसाली के परिवार ने मरणोपरांत नेत्रदान करवाया था। अब उसी परिवार से स्व. बिमला देवी भंसाली का नेत्रदान मंगलवार को संपन्न हुआ।

नेत्रदान प्रक्रिया और चिकित्सकीय सहयोग

तेरापंथ युवक परिषद फारबिसगंज और कटिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र विभाग की टीम ने तत्परता से प्रक्रिया पूरी की। डॉ अभिनव गुप्ता, डॉ मो. फैजल और डॉ मो. इमरान ने फारबिसगंज पहुंचकर मृतका का कॉर्निया कलेक्ट किया।

परिवार की सहमति और प्रेरक संदेश

बिमला देवी भंसाली के तीनों पुत्र महेंद्र, मनोज और नरेंद्र भंसाली ने नेत्रदान की स्वीकृति दी। परिवार ने बताया कि उनकी माताजी धार्मिक प्रवृत्ति की थीं और पिछले साल ही मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प पत्र भर चुकी थीं।

तेरापंथ युवक परिषद की भूमिका

आशीष गोलछा ने कहा कि परिषद हमेशा रक्तदान और मरणोपरांत नेत्रदान जैसे मानव सेवा कार्यों में तत्पर रहती है। पंकज नाहटा ने भी कहा कि रक्तदान और नेत्रदान से हम दूसरों की जिंदगी बचा सकते हैं।

मरणोपरांत नेत्रदान का सामाजिक महत्व

एक मरणोपरांत नेत्रदान से तीन-चार लोगों की जिंदगी रोशन हो सकती है। इस पहल ने समाज में जागरूकता बढ़ाई है और अन्य परिवारों को भी मानव सेवा के लिए प्रेरित किया है।

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