अब मीरजापुर में ही मिलेगा आधुनिक नेत्र उपचार, भैरो प्रसाद नेत्र चिकित्सालय बनेगा मल्टी-स्पेशलिटी केंद्र

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मीरजापुर। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित भैरो प्रसाद जायसवाल नेत्र चिकित्सालय को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से सुसज्जित मल्टी-स्पेशलिटी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। शासन ने अस्पताल के उन्नयन के लिए लगभग 6 करोड़ रुपये से अधिक का बजट स्वीकृत किया है। बजट उपलब्ध होते ही निर्माण कार्य और अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना शुरू की जाएगी।

ग्लूकोमा सहित गंभीर नेत्र रोगों का इलाज अब मीरजापुर में

अस्पताल के उन्नयन के बाद यहां ग्लूकोमा जैसे गंभीर नेत्र रोगों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके लिए आधुनिक जांच मशीनें और उपचार उपकरण लगाए जाएंगे। इससे पहले मरीजों को इस तरह के इलाज के लिए बड़े शहरों में जाना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही उन्नत नेत्र चिकित्सा संभव होगी।

आकस्मिक चिकित्सा इकाई और आईसीसीयू की स्थापना

भैरो प्रसाद नेत्र चिकित्सालय की आकस्मिक चिकित्सा इकाई (इमरजेंसी यूनिट) को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा। इसमें:

  • इमरजेंसी रेसुसिटेशन किट
  • सक्शन मशीन
  • ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम
  • इन्फ्यूजन पंप
  • मोबाइल एक्स-रे मशीन
  • सेमी फाउलर बेड
  • आधुनिक फर्नीचर

के साथ-साथ चार बेड वाला आईसीसीयू वार्ड भी स्थापित किया जाएगा, जिससे गंभीर मरीजों को तत्काल और बेहतर उपचार मिल सके।

अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनेगा

सर्जरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अस्पताल में नया अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर तैयार किया जाएगा। इसमें ऑपरेशन टेबल, ईसीजी और बीपी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन सिलेंडर ट्रॉली, रेफ्रिजरेटर और वातानुकूलन (एसी) की समुचित व्यवस्था होगी।

मल्टी-स्पेशलिटी केंद्र के रूप में होगा विकास

भैरो प्रसाद नेत्र चिकित्सालय को अब केवल नेत्र रोगों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे मल्टी-स्पेशलिटी स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां:

  • नेत्र रोग
  • त्वचा रोग
  • डेंटल
  • आर्थोपेडिक
  • फिजियोथेरपी

इकाइयों की स्थापना की जाएगी। मंडलीय अस्पताल में स्थान की कमी के चलते इन विभागों को यहां स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे मरीजों की भीड़ कम होगी और इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी।

आसपास के जिलों को भी मिलेगा लाभ

अस्पताल के आधुनिकीकरण से मीरजापुर के साथ-साथ आसपास के जनपदों के मरीजों को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं अपने जिले में ही उपलब्ध हो सकेंगी। यह परियोजना क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

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