पेरिस में जयशंकर की वाइमर देशों से ऐतिहासिक बैठक, इंडो-पैसिफिक पर भारत का पक्ष रखा

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फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने एक अहम कूटनीतिक पहल के तहत जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ पहली बार वाइमर फॉर्मेट में बैठक की। इस बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की चुनौतियों, भारत-यूरोपीय संघ संबंधों और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

🌏 इंडो-पैसिफिक पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत इंडो-पैसिफिक को मुक्त, खुला और समावेशी क्षेत्र मानता है। उन्होंने हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा, व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भारत की सोच वाइमर देशों के सामने रखी।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब चीन, अमेरिका और अन्य शक्तियों की गतिविधियों के कारण इंडो-पैसिफिक वैश्विक रणनीति का केंद्र बन चुका है।

🇺🇦 यूक्रेन युद्ध पर भी हुई चर्चा

जयशंकर ने बताया कि बैठक में यूक्रेन संघर्ष पर भी विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति खुलकर रखी और बातचीत ईमानदार व रचनात्मक रही।

🤝 भारत-यूरोप रिश्तों को नई मजबूती

इससे पहले फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरट से मुलाकात में जयशंकर ने कहा कि

“यूरोप वैश्विक शक्ति संतुलन में एक अहम भूमिका निभाता है और भारत-यूरोप साझेदारी को और मजबूत करना समय की जरूरत है।”

उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले हफ्तों में भारत जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की मेजबानी करेगा।

🌊 इंडो-पैसिफिक क्यों अहम है

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में

  • दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी रहती है
  • वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से गुजरता है
  • भारत की IPOI (Indo-Pacific Ocean Initiative) इसी क्षेत्र में सहयोग और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए है

अमेरिका की IPEF (Indo-Pacific Economic Framework) भी इसी दिशा में एक आर्थिक पहल है।

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