मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना से मिलता है स्वास्थ्य और ऊर्जा – स्वामी विज्ञानानंद

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हरिद्वार में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने भगवान सूर्य को सृष्टि का प्रत्यक्ष देवता बताया।
उन्होंने कहा कि सूर्य के प्रकाश से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है और यही ऊर्जा समस्त जीव-जगत को संचालित करती है।

☀️ सूर्य और प्रकृति का गहरा संबंध

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मौसम में बड़ा परिवर्तन आता है।
सर्दी का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और धरती पर ऊष्मा बढ़ने लगती है।

उन्होंने बताया कि सूर्य की गति बदलने से ही वनस्पतियों और जीवों में नवजीवन का संचार होता है।

🌞 उत्तरायण का आध्यात्मिक महत्व

मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होते हैं, अर्थात उनकी किरणें दक्षिण से उत्तर की ओर लौटने लगती हैं।
यह काल शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।

स्वामी जी ने कहा कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं, इसलिए यह पर्व पारिवारिक प्रेम और सौहार्द का प्रतीक भी है।

🧘‍♂️ सूर्य उपासना से स्वास्थ्य लाभ

मकर संक्रांति सूर्य उपासना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि
सूर्य की आराधना करने से शरीर में नई ऊर्जा आती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि इस दिन गंगा स्नान कर तिल-गुड़ और खिचड़ी का दान करें।
जो लोग गंगा नहीं जा सकते, वे स्नान जल में गंगाजल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।

🙏 आध्यात्मिक संदेश

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सूर्य नमस्कार और सूर्य को अर्घ्य देने से पाप, ताप और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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