प्राकृतिक खेती से चमकी किस्मत, रिटायर्ड प्रिंसिपल ने उगाई 10 क्विंटल हल्दी

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हमीरपुर, 20 जनवरी (हि.स.) — हिमाचल प्रदेश में Natural farming turmeric को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयास रंग ला रहे हैं। भोरंज उपमंडल के बैरी ब्राहम्णा गांव के 76 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुभाष कपिला और उनकी पत्नी उर्मिला कपिला ने प्राकृतिक विधि से लगभग 10 क्विंटल हल्दी उगाकर किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करते हुए गेहूं 60 रुपये/किलो, मक्का 40 रुपये/किलो और कच्ची हल्दी 90 रुपये/किलो की दर से खरीद रही है। इसी नीति से प्रेरित होकर कपिला दंपत्ति ने इस सीजन में हल्दी की खेती शुरू की।

कृषि विभाग की एसएमएस मोनिका शर्मा के मार्गदर्शन और विभाग से मिले बीज की मदद से उन्होंने पूरी तरह रासायनिक-मुक्त खेती की। उन्होंने किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या जहरीले कीटनाशक का उपयोग नहीं किया।

सुभाष कपिला बताते हैं कि हल्दी की खेती में मेहनत कम लगती है, जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते और लागत भी कम रहती है। सरकारी समर्थन के कारण यह फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।

दिलचस्प यह है कि कपिला दंपत्ति के बेटे डेंटल सर्जन और बहू सीनियर अकाउंटेंट हैं, फिर भी उन्होंने खेती से नाता नहीं तोड़ा। वे मानते हैं कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि आर्थिक रूप से भी टिकाऊ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उदाहरण हिमाचल में जैविक और प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करेंगे।

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