लखनऊ में शंकराचार्य का शंखनाद
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने बुधवार को लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन में गौ माता राष्ट्रमाता मांग अविमुक्तेश्वरानन्द के तहत बड़ा आह्वान किया।
उन्होंने गौ माता को भारत की राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग करते हुए गौ भक्तों को संबोधित किया।
अनुमति को लेकर सरकार पर सवाल
कार्यक्रम के लिए सशर्त अनुमति मिलने पर शंकराचार्य ने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि शर्त लगाना दैत्यों और दानवों का पुराना तरीका है और इससे कोई अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
‘गौरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा’ का आह्वान
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द इस समय गौरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा पर हैं।
गौ माता राष्ट्रमाता मांग अविमुक्तेश्वरानन्द के दौरान उन्होंने कहा कि गंगोत्री से निकलने वाली गंगा की तरह यह आंदोलन आगे चलकर बड़ा रूप लेगा।
शंकराचार्य को बताया सनातन धर्म की सुप्रीम कोर्ट
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य सनातन धर्म की सर्वोच्च व्यवस्था हैं।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य सनातन धर्म की सुप्रीम कोर्ट हैं, जबकि मठ-मंदिरों के महंत हाई कोर्ट और साधु-संत लोअर कोर्ट के समान हैं।
गाय को बताया सनातन की आत्मा
शंकराचार्य ने कहा कि गाय सनातन संस्कृति की आत्मा है।
उन्होंने कहा कि गौ माता राष्ट्रमाता मांग अविमुक्तेश्वरानन्द के पीछे उद्देश्य गौ संरक्षण और समाज के कल्याण का है।
संतों ने भी उठाई गौ रक्षा की मांग
कार्यक्रम में कई संतों और धर्माचार्यों ने भी गौ हत्या रोकने और गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग उठाई।



