📍 कहां का है मामला?
सासाराम के कोचस प्रखंड के सरेयां गांव से एक चौंकाने वाला जमीन विवाद सामने आया है।
यहां एक बुजुर्ग महिला अपनी ही पैतृक संपत्ति के लिए वर्षों से न्याय की गुहार लगा रही हैं।
👵 बुजुर्ग महिला की दर्दभरी कहानी
पीड़िता आशा पांडेय, जो गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, आरोप लगाती हैं कि उनकी 26 एकड़ पैतृक जमीन को कागजी हेरफेर कर हड़प लिया गया।
वे शासन-प्रशासन से लेकर अदालत तक गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं मिला।
📜 कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह मामला वर्ष 2011 से जुड़ा बताया जा रहा है।
परिवार के मुखिया स्व. मारकंडेय तिवारी के निधन के बाद संपत्ति उनकी पत्नी और तीन बेटियों के नाम दर्ज थी।
लेकिन आरोप है कि बाद में दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन को एक पक्ष के नाम करने की कोशिश की गई।
⚖️ लोक अदालत ने पहले ही खारिज की डिग्री
साल 2012 में लोक अदालत ने कथित डिग्री को निरस्त कर दिया था।
अदालत ने माना कि गलत जानकारी देकर समझौता कराया गया था।
इसके बाद जमीन चारों वारिसों के नाम दर्ज हो गई थी।
🧾 फिर कैसे बदला रिकॉर्ड?
पीड़िता का आरोप है कि 2016 में फिर से राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया गया।
इस बार जमीन का बड़ा हिस्सा एक बहन और उसके बेटों के नाम दर्ज हो गया।
यही सवाल अब पूरे मामले का सबसे बड़ा विवाद बन गया है।
❓ उठ रहे गंभीर सवाल
- जब लोक अदालत डिग्री रद्द कर चुकी थी, तो रिकॉर्ड फिर कैसे बदला?
- मां के जीवित रहते बेटों के नाम जमीन कैसे दर्ज हुई?
- अन्य वारिसों को बिना जानकारी हटाया कैसे गया?
🏛️ प्रशासन से न्याय की मांग
पीड़िता ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जमीन रिकॉर्ड की जांच की अपील की है।



