आरबीआई की अहम बैठक पर सबकी नजर
देशभर के निवेशकों, उद्योग जगत और आम लोगों की नजर अब आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हुई है। यह बैठक 3 जून से शुरू होकर 5 जून तक चलेगी, जिसमें रेपो रेट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया जाएगा।
रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में किसी बदलाव की संभावना कम है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है।
क्यों अहम है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य ऋणों की ब्याज दरों पर पड़ता है। इसलिए हर मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहती है।
महंगाई और वैश्विक तनाव बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती ऊर्जा कीमतें, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर होता रुपया आरबीआई के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इन कारणों से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
आरबीआई अपना सकता है सतर्क रुख
पिछली बैठक में भी आरबीआई ने रेपो रेट को स्थिर रखा था। केंद्रीय बैंक ने तब वैश्विक परिस्थितियों का आकलन करने के लिए इंतजार करने की रणनीति अपनाई थी। इस बार भी रेपो रेट को स्थिर रखते हुए हालात पर नजर बनाए रखने की संभावना जताई जा रही है।
5 जून को आएगा बड़ा फैसला
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को बैठक के फैसलों की घोषणा करेंगे। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि रेपो रेट पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन भविष्य की आर्थिक दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत जरूर मिल सकते हैं।



