भारत की तीसरी महिला राष्ट्रपति ने अपने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद देश की राजनीति में एक नई शुरुआत की थी। विद्या भंडारी, जिन्हें उनके समय के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक माना जाता है, ने अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए और देश को एक नए दिशा में आगे बढ़ाया।
जीवन और करियर
विद्या भंडारी का जन्म 8 सितंबर 1938 को महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता एक किसान थे और माता एक गृहिणी। विद्या ने अपनी शिक्षा पुणे के एक सरकारी स्कूल से पूरी की और बाद में महाराष्ट्र विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उनकी राजनीतिक यात्रा 1960 के दशक में शुरू हुई जब उन्होंने एक सामाजिक संगठन में शामिल होकर अपनी सेवाएं देनी शुरू कीं।
राजनीतिक जीवन
विद्या भंडारी ने 1970 के दशक में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होकर राजनीति में अपनी पारी शुरू की। उन्होंने अपनी पहली लोकसभा की सदस्यता 1971 के चुनाव में जीती और बाद में कई बार लोकसभा और राज्यसभा की सदस्यता के लिए चुनी गईं। 1984 में जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई और राजीव गांधी ने कांग्रेस की अध्यक्षता संभाली तो विद्या भंडारी को कांग्रेस का महासचिव बनाया गया।
राष्ट्रपति चुनाव
1992 में जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुआ तो विद्या भंडारी को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया। उन्होंने इस चुनाव में श्री वेंकटरमन सिंग को हराकर भारत की तीसरी महिला राष्ट्रपति बनीं। उनके राष्ट्रपति पद के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए और देश को एक नए दिशा में आगे बढ़ाया।
निष्कर्ष
विद्या भंडारी की राजनीतिक यात्रा ने उन्हें भारत की सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक बनाया। उनके राष्ट्रपति पद के कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश को एक नए दिशा में आगे बढ़ाया और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उनकी राजनीतिक यात्रा को याद रखने के लिए उनके जीवन की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए एक पुस्तक का प्रकाशन किया गया है।


