जालुकबाड़ी थाने के अंतर्गत दुर्गापूजा और पांडुघाट में विसर्जन को लेकर बैठक

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जालुकबाड़ी थाने के अंतर्गत दुर्गापूजा और पांडुघाट में विसर्जन को लेकर बैठक

जालुकबाड़ी थाने के अंतर्गत पांडुघाट और दुर्गापूजा के क्षेत्र में आने वाली रीतियों के दौरान होने वाले अवशेषों के निस्तारण को लेकर 4 अक्टूबर 2026 को एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था यह सुनिश्चित करना कि पंडालों के बाद होने वाले विसर्जन और फेंके जाने वाले अवशेषों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निपटाया जाए, जिससे नदियों और जलाशयों में प्रदूषण न हो और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव न पड़े। पुलिस, नगर निगम, स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और पंचायत के प्रतिनिधियों ने मिलकर इस विषय पर चर्चा की।

पांडुघाट में दूषित जलाशय की सफाई की योजना

पांडुघाट के नज़दीक स्थित जलाशय पर पिछले वर्ष के दौरान फेंके गए अवशेषों के कारण पानी की गुणवत्ता में गिरावट आई थी। पुलिस के प्रमुख ने बताया कि अब एक विस्तृत सफाई अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें कचरे को अलग-अलग बिनों में जमा कर फ्यूमेशन के माध्यम से नष्ट किया जाएगा। साथ ही, जलाशय के चारों ओर कचरा संग्रहण के लिए नई बिन व्यवस्था भी लागू की जाएगी। इस योजना के तहत 12 घंटे के दौरान हर घंटे एक बार सफाई दल जलाशय के किनारे से कचरा हटाएगा, जिससे जलाशय की स्वच्छता बनी रहेगी।

ध्वंस के बाद सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के उपाय

दुर्गापूजा के दौरान ध्वंस के बाद उत्पन्न होने वाले कचरे का सही निपटान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की है। टीम के सदस्यों को रासायनिक अवशेष, कांच के टुकड़े और खाद्य कचरे को अलग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, ध्वंस स्थल के आसपास सुरक्षा बाड़ लगाई जाएगी और लोगों को सुरक्षित दूरी पर खड़े रहने के लिए चेतावनी दी जाएगी। सुरक्षा कैमरे और निगरानी डिवाइस से लैस कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी अवैध कचरा निस्तारण न हो।

पर्यावरण संरक्षण के लिए नई नीतियाँ और मार्गदर्शिका

नगर निगम ने एक नई नीति पेश की है जिसके अंतर्गत सभी पंडालों को पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। पंडालों को बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनाना, जलाशयों के पास अवशेषों को फेंकने पर प्रतिबंध और रासायनिक अवशेषों के लिए विशेष डंपिंग स्टेशन स्थापित करना इस नीति का हिस्सा है। इसके अलावा, पंडाल के ध्वंस के बाद एक ‘ग्रीन क्लीनअप’ कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसमें स्थानीय स्वयंसेवी समूह और स्कूल के छात्र भाग लेंगे।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी और जागरूकता अभियान

बैठक में स्थानीय नेताओं ने बताया कि समुदाय की सक्रिय भागीदारी से ही इस समस्या का समाधान संभव है। पंचायत ने पंडालों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाने के लिए स्वयंसेवी समूहों को प्रोत्साहित किया है। साथ ही, सोशल मीडिया और स्थानीय रेडियो के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें लोगों को सही कचरा निपटान के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह प्रयास न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा बल्कि त्योहारों के दौरान लोगों के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखेगा।

निष्कर्ष

जालुकबाड़ी थाने के अंतर्गत पांडुघाट और दुर्गापूजा के क्षेत्र में अवशेषों के निस्तारण पर हुई इस बैठक से स्पष्ट हुआ कि पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक समन्वित प्रयास आवश्यक है। नई नीतियाँ, सुरक्षा उपाय और समुदाय की भागीदारी से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि त्योहारों के दौरान उत्पन्न होने वाला कचरा सही तरीके से निपटाया जाए और जलाशय तथा नदियाँ स्वच्छ रहें। इस पहल के सफल क्रियान्वयन से क्षेत्र में सतत विकास और स्वच्छता की नई मिसाल कायम होगी।