एक शांत सुबह दिल्ली के राष्ट्रीय गैलरी के दरवाज़े पर भीड़ उमड़ने लगी, जब एक अनोखी फ़ोटोग्राफ़ी को प्रदर्शित करने की घोषणा की गई। यह फ़ोटो, जो प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़र अर्जुन गुप्ता द्वारा ली गई है, एक साधारण माँ की अनोखी छवि को कैद करती है, जिसे देखकर लोग अपनी माताओं के प्रति नए सिरे से भावुक हो रहे हैं। इस कहानी की शुरुआत एक साधारण परिवार से हुई, लेकिन अब यह फ़ोटो देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी है।
प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़र द्वारा ली गई माँ की छवि
अर्जुन गुप्ता, जो अपने मानवतावादी फ़ोटोग्राफ़ी के लिए जाने जाते हैं, ने 2024 में शांति देवी, एक 45 वर्षीय माँ, की तस्वीर ली थी। यह तस्वीर एक सर्दियों की सुबह, उनके घर के बगीचे में ली गई थी, जब माँ अपने बच्चे के साथ खेल रही थीं। गुप्ता ने फ़्रेम में माँ की आँखों में गहराई और चेहरे पर हल्की मुस्कान को कैद किया, जो दर्शकों को तुरंत ही भावनाओं से जोड़ देती है। इस फ़ोटो को गैलरी में प्रदर्शित करने का निर्णय गुप्ता के एक निजी प्रोजेक्ट के रूप में आया, जिसका उद्देश्य मातृत्व की अनकही कहानियों को प्रकाश में लाना था।
संग्रहालय में माँ के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ी
गैलरी के उद्घाटन के दिन, लगभग 500 लोग गैलरी के प्रवेश द्वार पर खड़े थे, सभी ने माँ की फ़ोटो को देखने के लिए उत्सुकता दिखाई। गैलरी के अंदर एक विशेष प्रदर्शनी क्षेत्र तैयार किया गया, जहाँ फ़ोटो के साथ शांति देवी के जीवन के कुछ दस्तावेज़ और उनकी बेटी की लिखी हुई चिट्ठियाँ भी रखी गई थीं। दर्शक फ़ोटो के सामने खड़े होकर भावुक होकर आँसू बहाने लगे, और कुछ ने फ़ोटो को हाथ से छूते हुए कहा कि यह उनकी अपनी माँ की याद दिलाती है।
माँ की कहानी: संघर्ष और प्रेम का प्रतीक
शांति देवी का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। उन्होंने अपने पति के अचानक निधन के बाद तीन बच्चों की परवरिश अकेली ही की। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षा और प्रेम से पोषित किया। फ़ोटो में दिख रही माँ


